सीहोर नहीं आए कांग्रेस के प्रादेशिक नेता…!

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सीहोर। राजनीति में कहावत है कि जब सेना संकट में हो तो सेनापति को मैदान में होना चाहिए, लेकिन सीहोर में कांग्रेस की तस्वीर इसके ठीक उलट है। यहां जमीनी कार्यकर्ता तो सत्ताधारी दल और पुलिस की एफआईआर से लोहा ले रहे हैं, लेकिन भोपाल में बैठने वाले कांग्रेस के ‘प्रादेशिक क्षत्रप’ सीहोर की सीमा लांघने को तैयार नहीं हैं।
बता दें पिछले 5 महीनों का रिकॉर्ड देखें तो सीहोर और आष्टा में राजनीति जनसेवा से ज्यादा थानों के चक्कर काटने में सिमट गई है। सितंबर 2025 से अब तक 9 कांग्रेसी नेताओं पर 4 अलग-अलग मामलों में एफआईआर दर्ज हो चुकी है। कभी पुतला दहन के दौरान झड़प, कभी जनसमस्याओं को लेकर मुखर होना तो कभी कॉलेज स्टाफ की शिकायत, ृवजह जो भी हो, कानूनी शिकंजा कांग्रेसियों पर ही कसता दिख रहा है।
अपनों ने ही फेरा मुंह
हैरानी की बात यह है कि जहां भाजपा का अभेद्य किला ढहाने के लिए कार्यकर्ता सडक़ों पर संघर्ष कर रहे हैं और मुकदमे झेल रहे हैं, वहीं कांग्रेस के बड़े नेताओं ने सीहोर से रहस्यमयी दूरी बना ली है। पंकज शर्मा से लेकर युवा कांग्रेस अध्यक्ष देवेंद्र ठाकुर तक सभी कानूनी लड़ाई खुद ही लड़ रहे हैं। कार्यकर्ताओं में दबी जुबान में चर्चा है कि क्या प्रादेशिक नेताओं के लिए सीहोर सिर्फ पिकनिक स्पॉट है जो केवल चुनाव के वक्त याद आता है।
भाजपा के गढ़ में कार्यकर्ताओं का संघर्ष
जिले की चारों सीटों पर भाजपा का कब्जा है। इछावर से लेकर बुदनी तक भगवा खेमा मजबूत है फिर भी कांग्रेसियों ने सक्रियता कम नहीं की है। बुदनी उपचुनाव में भाजपा को हुए 90 हजार वोटों के नुकसान ने बताया कि कार्यकर्ता लडऩे को तैयार है, लेकिन सवाल यही खड़ा होता है कि जब सिपाही घायल हो रहे हैं तो कांग्रेस के बड़े साहब उनका मनोबल बढ़ाने सीहोर कब आएंगे या फिर कार्यकर्ताओं को ऐसे ही उनके हाल पर छोड़ दिया जाएगा।