सीहोर में रिश्तों की हार, कानून की हुई जीत…!

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सीहोर। जिस मां ने अपना पूरा जीवन बेटे के भविष्य के लिए समर्पित कर दिया, आज उसी मां को दो वक्त की रोटी और सम्मान के लिए कानून का दरवाजा खटखटाना पड़ा। यह हृदयविदारक मामला शहर के लुनिया मोहल्ला गंज का है, जहां एक बुजुर्ग विधवा मां शांताबाई को अपने इकलौते बेटे से भरण-पोषण पाने के लिए एसडीएम न्यायालय की शरण लेनी पड़ी।
बुजुर्ग शांताबाई का इकलौता पुत्र विनोद ग्राम गोपालपुरा में मां की ही स्वामित्व वाली भूमि पर खेती करता है। जमीन से होने वाली पूरी कमाई बेटा रख लेता है, लेकिन जिस मां ने उसे इस काबिल बनाया, उसी के भरण-पोषण से उसने पल्ला झाड़ लिया। थक हारकर बुजुर्ग मां ने माता-पिता एवं वरिष्ठ नागरिक भरण-पोषण अधिनियमश् के तहत गुहार लगाई।
एसडीएम का संवेदनशील फैसला
एसडीएम तन्मय वर्मा ने इस मामले को न केवल प्रशासनिक नजरिए से देखा, बल्कि मानवीय संवेदनाओं को प्राथमिकता दी। सुनवाई के दौरान जब बेटा अपनी जिम्मेदारी निभाने का कोई ठोस प्रमाण नहीं दे सका, तो एसडीएम न्यायालय ने मां के पक्ष में फैसला सुनाया। कोर्ट ने आदेश दिया कि बेटा हर महीने 1500 रुपये भरण-पोषण राशि सीधे मां के बैंक खाते में जमा कराएगा।