सीहोर। जिले में भू-माफियाओं के हौसले इतने बुलंद हैं कि वे प्रशासनिक आदेशों को भी हवा में उड़ाने से बाज नहीं आ रहे हैं। कलेक्टर बालागुरू के. द्वारा जिले भर में अवैध कॉलोनियों पर शिकंजा कसने के लिए जारी किए गए सख्त निर्देशों के बावजूद मैदानी स्तर पर स्थिति जस की तस बनी हुई है। आलम यह है कि जिला मुख्यालय से लेकर तहसील स्तर तक बिना किसी अनिवार्य अनुमति के नई कॉलोनियां बसाई जा रही हैं और भोले-भाले लोगों को प्लॉट बेचे जा रहे हैं।
गौरतलब है कि कलेक्टर बालागुरू के. ने 3 दिसंबर 2025 को जिले के सभी राजस्व अधिकारियों, नगर पालिका अधिकारियों और जनपद अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए थे। आदेश में कहा गया था कि जिले में बिना अनुमति के बन रही अवैध कॉलोनियों की जांच की जाए और एक सप्ताह के भीतर उनकी सूची प्रस्तुत की जाए। इस आदेश के बाद प्रशासनिक गलियारों में हडक़ंप तो मचा, लेकिन इसकी तामील में कई विभागों ने सुस्ती दिखाई है। खास बात यह है कि प्रशासन केवल सूची तैयार करने में जुटा है तो दूसरी भू माफिया अवैध कालोनी काटने में जुटे हुए हैं। प्रशासन इन माफियाओं पर कोई कार्रवाई नहीं कर रहा है, जिसका उदाहरण जिला मुख्यालय स्थित नारायण विहार कालोनी को देखकर लगाया जा सकता है, जहां कृषि भूमि पर भू माफिया बिना विकास अनुमति के कालोनी काटकर प्लॉट बेच रहे हैं, लेकिन प्रशासन कार्रवाई करने की जगह महज नोटिस की औपचारिकता ही कर रहा है।
सीहोर-भैरुंदा और दोराहा ने भेजी सूची
कलेक्टर के कड़े रुख के बाद कुछ अधिकारियों ने सक्रियता दिखाई है। सीहोर शहर तहसीदलदार ने सूची बनाकर कलेक्टर को भेज दी है, इसी तरह भैरुंदा सीएमओ राम प्रसाद भावरे ने अपने क्षेत्र की ऐसी 16 कॉलोनियों की सूची बनाकर कलेक्ट्रेट कार्यालय भेजी है, जो अवैध रूप से संचालित हैं। जबकि दोराहा प्रशासन ने भी दोराहा-झरखेड़ा क्षेत्र की 16 अवैध कॉलोनियों की सूची जिला प्रशासन को भेजी है। हालांकि जिले के कई अन्य क्षेत्रों के अधिकारी अभी भी जानकारी जुटाने के नाम पर ढील-पोल कर रहे हैं, जिसका फायदा भू-माफिया उठा रहे हैं।
नियमों को ताक पर रखकर हो रहा विकास
जिले भर में कई ऐसी कॉलोनियां हैं जहां बिजली, पानी, ड्रेनेज और सडक़ जैसी बुनियादी सुविधाओं के लिए अनिवार्य विकास अनुमति नहीं ली गई है। टाउन एंड कंट्री प्लानिंग और रेरा जैसे महत्वपूर्ण नियमों की अनदेखी कर प्लॉट बेचे जा रहे हैं।
रिश्तों के आगे नतमस्तक प्रशासनिक नियम
जिला मुख्यालय पर ही एक ऐसा ताजा मामला सामने आया है जहां नियमों की सरेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। बताया जा रहा है कि शहर में एक नई कॉलोनी काटी जा रही है, जिसके कर्ता-धर्ताओं ने विकास अनुमति लेना तक मुनासिब नहीं समझा। सूत्रों की मानें तो इस कॉलोनी में एक बड़े प्रशासनिक अधिकारी के भाई का नाम भी शामिल है। शायद यही वजह है कि कलेक्टर के आदेश के बावजूद इस कॉलोनी पर कोई कार्रवाई नहीं हो रही है और न ही इसे अवैध की सूची में डालने की हिम्मत दिखाई जा रही है।
सावधान: प्लॉट खरीदने से पहले ये 5 दस्तावेज जरूर देखें
कालोनाइजर लाइसेंस: जिला कलेक्टर कार्यालय द्वारा जारी।
टी एंड सीपी मंजूरी: टाउन एंड कंट्री प्लानिंग विभाग से स्वीकृत नक्शा।
विकास अनुमति: स्थानीय निकाय से बिजली, पानी और ड्रेनेज के विकास की अनुमति।
रेरा पंजीयन: मप्र रेरा में रजिस्ट्रेशन के बिना प्लॉट बेचना गैरकानूनी है।
एनओसी: नजूल विभाग और पर्यावरण विभाग से अनापत्ति प्रमाण पत्र।
इनका कहना है
- हमने अपने क्षेत्र की 16 अवैध कॉलोनियों की जानकारी जिला प्रशासन को भेज दी है।
राम प्रसाद भावरे, सीएमओए भैरुंदा - अभी अवैध कॉलोनियों के संबंध में जानकारी जुटाई जा रही है, जल्द ही सूची तैयार कर भेजी जाएगी।
- संजय अग्रवाल, जनपद सीईओ भैरुंदा
- सूची तैयार कर कलेक्टर को भेज दी है, निर्देश मिलने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।
अमित सिंह, तहसीलदार सीहोर शहर


