सीहोर। भारत को दलहन उत्पादन में दुनिया का सिरमौर बनाने के लिए केंद्र सरकार ने अब प्रयोगशाला से खेत तक की दूरी पाटने की तैयारी कर ली है। शनिवार को सीहोर के अमलाहा में आयोजित राष्ट्रीय सम्मेलन में केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बीज ग्राम विकसित करने का बड़ा ऐलान किया। प्रधानमंत्री मोदी के विजन को साझा करते हुए चौहान ने स्पष्ट किया कि जब गांव-गांव में उन्नत बीज तैयार होंगे, तभी देश दालों के आयात की मजबूरी से मुक्त होकर सच्चे अर्थों में आत्मनिर्भर बनेगा।
सम्मेलन में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के साथ मध्य प्रदेश और देश के कई प्रमुख राज्यों के कृषि मंत्री, वैज्ञानिक और विशेषज्ञ एक मंच पर जुटे। शिवराज सिंह चौहान ने इस जमावड़े को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि आज अमलाहा की पवित्र धरा पर दलहन क्षेत्र की चुनौतियों और भविष्य की संभावनाओं पर गंभीर मंथन हो रहा है। उन्होंने खुद खेतों का भ्रमण कर उन्नत किस्मों का अवलोकन किया और किसानों से संवाद कर उनकी समस्याएं सुनीं।
अत्याधुनिक प्रयोगशालाओं का लोकार्पण
केंद्रीय मंत्री और अतिथियों ने अमलाहा में कृषि अनुसंधान को नई ऊंचाई देने के लिए प्रशासनिक भवनए किसान प्रशिक्षण केंद्र और प्लांट जीनोमिक्स व टिश्यू कल्चर जैसी हाई-टेक प्रयोगशालाओं का लोकार्पण किया। इसके साथ ही पल्सेस मिशन पोर्टल की भी शुरुआत की गई, जो डिजिटल माध्यम से किसानों की मदद करेगा।
पांच किसानों का हुआ सम्मान
कार्यक्रम के दौरान शिवराज सिंह चौहान ने उत्कृष्ट कार्य करने वाले 5 प्रगतिशील किसानों को सम्मानित किया और उन्हें उन्नत बीजों की किट प्रदान की। ऑडिटोरियम में आयोजित तकनीकी सत्र में उन्होंने वैज्ञानिकों और मिलर्स के साथ दलहन फसलों में रोग प्रबंधन, एमएसपी पर समय पर खरीदी और बीज उत्पादन संवर्धन जैसे गंभीर विषयों पर चर्चा की।


