मण्डी श्मशान बना उद्यान…

04 sehore photo 09

सीहोर। शहर का मंडी श्मशान घाट अब केवल शोक स्थल नहीं, बल्कि जनभागीदारी और सेवा भाव से एक आदर्श शांति उद्यान बन चुका है, जहां गुलाबों की खुशबू और हरियाली सुकून का अहसास कराती है। श्मशान घाट की तस्वीर अब पूरी तरह बदल चुकी है।
कभी उदासी और सूनेपन का प्रतीक रहने वाला यह स्थल आज श्मशान समिति और आम नागरिकों के साझा प्रयासों से एक आकर्षक पार्क जैसा नजर आता है। यहां समिति द्वारा कराए गए विकास कार्यों ने इसे एक ऐसी मिसाल बना दिया है, जहां आने वाले लोगों की सुविधाओं का बारीकी से ध्यान रखा गया है।
आध्यात्मिक वातावरण
परिसर में प्रवेश करते ही श्रद्धालुओं को भगवान शिव और माता कालका के दर्शन होते हैं। पूरे परिसर में पेवर ब्लॉक बिछाए गए हैं और एक भव्य प्रवेश द्वार बनाया गया है। बैठने के लिए आरामदायक बेंच, शुद्ध ठंडे पानी के लिए फ्रीजर और व्यवस्थित शोकसभा स्थल जैसी सुविधाएं यहां उपलब्ध हैं। दाह संस्कार के बाद मुंडन के लिए भी एक अलग और स्वच्छ स्थान सुरक्षित किया गया है।
महकती है गुलाब की खुशबू
समिति ने पर्यावरण संरक्षण को प्राथमिकता देते हुए यहां एक सुंदर बगीचा विकसित किया है। परिसर में 100 से अधिक गुलाब के पौधे महक रहे हैं, वहीं पपीते सहित कई फलदार और छायादार वृक्ष लगाए गए हैं, जो श्मशान के वातावरण को सकारात्मक बनाते हैं।
जनभागीदारी का अद्भुत मॉडल
इस कायाकल्प की सबसे बड़ी खूबी यह है कि यह सरकारी मदद के साथ-साथ आम जनता के एक-एक रुपये के दान से संभव हुआ है। शवयात्रा में शामिल होने वाले लोग स्वेच्छा से जो 10, 20 या 50 रुपये दान करते हैं, उसी छोटी पूंजी से यह बड़ा बदलाव आया है। मंगलवार को भी एक स्थानीय शर्मा परिवार ने अपनी माता जी की स्मृति में 5100 रुपये की सहयोग राशि प्रदान की, जबकि अन्य नागरिकों के सहयोग से 1700 रुपये एकत्रित हुए। समिति का कहना है कि यह सामूहिक प्रयासों का ही परिणाम है कि आज मंडी श्मशान घाट पूरे शहर के लिए स्वच्छता और विकास की एक नई मिसाल बन गया है।