पं. प्रदीप मिश्रा का वादा रहा अधूरा…!

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सीहोर। धर्म की नगरी सीहोर में मंगलवार को दो अलग-अलग तस्वीरें चर्चा का विषय बनी हुई हैं। एक तरफ विख्यात कथावाचक पंडित प्रदीप मिश्रा की वह भव्य घोषणा है जो केवल बयानों में दबकर रह गई, वहीं दूसरी तरफ शहर के चमत्कारेश्वर महादेव मंदिर समिति ने सीमित संसाधनों के बावजूद ‘परोपकार’ का वास्तविक उदाहरण पेश किया है।
बता दें फरवरी 2024 में रुद्राक्ष महोत्सव के दौरान पंडित प्रदीप मिश्रा ने व्यासपीठ से ताल ठोककर ऐलान किया था कि कुबेरेश्वर धाम साल के 365 दिन हर दिन एक गरीब कन्या का विवाह कराएगा। उन्होंने कहा था कि वि_लेश सेवा समिति विवाह का पूरा खर्च और गृहस्थी का सामान उठाएगी, लेकिन वक्त बीतने के साथ यह दावा केवल एक चुनावी वादे जैसा नजर आने लगा है। साल भर में 365 शादियां तो दूर, प्रतिदिन होने वाले विवाह की योजना का धरातल पर अता-पता नहीं है। सवाल उठ रहा है कि करोड़ों का दान प्राप्त करने वाले कुबेरेश्वर धाम के लिए क्या अपना ही वादा निभाना इतना कठिन हो गया है।
चमत्कारेश्वर मंदिर समिति ने कथा के साथ रचाई शादियां
एक ओर जहां बड़े मंचों से बड़े वादे किए जा रहे हैं, वहीं छावनी स्थित चमत्कारेश्वर महादेव मंदिर समिति ने शांतिपूर्ण तरीके से सेवा का अध्याय लिखा। सात दिवसीय भागवत कथा के समापन पर समिति ने भव्य सर्व जाति सामूहिक विवाह का आयोजन किया। समिति के अध्यक्ष मनोहर राय के नेतृत्व में अनेक कन्याओं का विवाह पूर्ण विधि-विधान और निशुल्क कराया गया।
उद्धव का ज्ञान और गोपियों का प्रेम
कथा के अंतिम दिन जगदगुरु पंडित अजय पुरोहित ने उद्धव-गोपी संवाद के जरिए एक गहरा संदेश दिया। उन्होंने कहा कि गोपियों के प्रेम के आगे उद्धव का ज्ञान हार गया। समाज में आज ऐसे कई ज्ञानी हैं जो मंचों से ज्ञान तो बांटते हैं, लेकिन जब बात प्रेम और सेवा को जमीन पर उतारने की आती है तो उनके हाथ पीछे खिंच जाते हैं। पंडित पुरोहित ने बताया कि प्रेम ही वह माध्यम है जिससे ईश्वर और समाज दोनों को जीता जा सकता है, केवल कोरे उपदेशों से नहीं।
समिति के प्रयासों की सराहना
चमत्कारेश्वर मंदिर में हुए इस आयोजन ने साबित कर दिया कि परोपकार के लिए बड़े बजट से ज्यादा ‘बड़ी नीयत’ की जरूरत होती है। क्षेत्रवासियों ने नवविवाहित जोड़ों को आशीर्वाद दिया और भंडारे के साथ कथा का समापन हुआ।