सीहोर। भारत और श्रीलंका की मेजबानी में 7 फरवरी से टी.20 वल्र्ड कप का आगाज हो चुका है। मैदान पर टीमें एक-दूसरे को मात देने में जुटी हैं, वहीं दूसरी ओर शहर में राजनीतिक संरक्षण प्राप्त सटोरियों ने भी अपना जाल बिछा दिया है। हैरानी की बात यह है कि शहर के बड़े सटोरियों को रसूखदार नेताओं का वरदहस्त प्राप्त है, जिसके चलते वे बेखौफ होकर युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ कर रहे हैं।
शहर में यह चर्चा आम है कि क्रिकेट सट्टे का यह कारोबार बिना राजनीतिक शह के संभव नहीं है। सूत्रों की मानें तो इन सटोरियों के तार सीधे सफेदपोश नेताओं से जुड़े हैं। यही वजह है कि इनकी पहचान सार्वजनिक होने के बावजूद कानून के हाथ इन तक नहीं पहुंच पा रहे हैं। रसूख की आड़ में सट्टे का यह अवैध धंधा गली-मोहल्लों तक पैर पसार चुका है।
बर्बादी की कगार पर युवा
वल्र्ड कप के शुरुआती मैचों में जहां छोटी टीमों के प्रदर्शन ने सबको चौंकाया, वहीं सीहोर के युवाओं के लिए यह रोमांच बर्बादी का सबब बन रहा है। सटोरियों के जाल में फफंसकर शहर के युवा अपनी गाढ़ी कमाई और जमापूंजी हार रहे हैं। कई घरों के चिराग कर्ज के दलदल में धंसते जा रहे हैं, जिससे न केवल उनका करियर बल्कि पारिवारिक जीवन भी तबाह हो रहा है।
कानून को ठेंगा दिखा रहे खिलाड़ी
तमाम प्रशासनिक दावों के उलट, वल्र्ड कप शुरू होते ही जिले में सट्टे की ऑनलाइन और ऑफलाइन बुकिंग तेज हो गई है। राजनीतिक संरक्षण के कारण इन सटोरियों में पुलिस का कोई खौफ नजर नहीं आता। यदि जल्द ही इन पर नकेल नहीं कसी गई तो क्रिकेट का यह जुनून कई परिवारों के लिए मातम में बदल सकता है।


