सीहोर। जिले की इछावर विधानसभा में इस समय राजनीति के पुराने ढर्रे और युवाओं की नई सोच के बीच टकराव साफ नजर आने लगा है। क्षेत्र के युवाओं ने पक्ष और विपक्ष दोनों ही दलों के जनप्रतिनिधियों की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। युवाओं का कहना है कि जहां जिले की अन्य विधानसभा सीटें जैसे सीहोर, बुदनी और आष्टा विकास, शिक्षा और रोजगार के मामले में कोसों आगे निकल चुकी हैं, वहीं इछावर आज भी बुनियादी सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहा है।
युवाओं का आरोप यह है कि क्षेत्र के नेता सामाजिक बुराइयों जैसे नुक्ता रसोई (मृत्यु भोज) को अपनी पहली प्राथमिकता मानकर चल रहे हैं। युवा राजेन्द्र परमार और चेतन वर्मा का कहना है कि दुनिया बदल रही है और लोग सामाजिक कुरीतियों से दूर हो रहे हैं, लेकिन इछावर के नेता इन कार्यक्रमों में न केवल बढ़ चढक़र हिस्सा लेते हैं, बल्कि सोशल मीडिया पर इनके फोटो-वीडियो ऐसे प्रचारित करते हैं जैसे शिक्षा या स्वास्थ्य के क्षेत्र में कोई बड़ा कीर्तिमान स्थापित कर दिया हो।
पक्ष हो या विपक्ष, इछावर के लिए सोचें
युवा ज्योति ठाकुर और असलम कुरैशी ने क्षेत्र के राजनीतिक इतिहास पर सवाल उठाते हुए कहा कि इछावर ने प्रदेश सरकार को तीन-तीन बार मंत्री दिए हैं। सत्ता और प्रभाव होने के बावजूद यहां उच्च शिक्षा के बेहतर विकल्प और रोजगार के साधन पर्याप्त नहीं हैं। युवाओं का कहना है कि जनप्रतिनिधि अक्सर शेरपुर या बडिय़ाखेड़ी इंडस्ट्रीज का श्रेय लेते हैं, लेकिन वास्तविकता यह है कि ये क्षेत्र जिला मुख्यालय सीहोर के पास हैं। इछावर शहर के युवाओं को आज भी काम की तलाश में बाहर ही भटकना पड़ता है।
सीहोर, आष्टा और बुदनी से पिछडऩे का मलाल
क्षेत्र के युवाओं में इस बात को लेकर भारी असंतोष है कि एक ही जिले में होते हुए भी इछावर विकास की दौड़ में पिछड़ गया है। बुदनी में औद्योगिक क्रांति है, सीहोर जिला मुख्यालय होने का लाभ ले रहा है और विकास के मामले में तेजी से आगे बढ़ रहा है, शहर में वीआईपी आकर्षक सडक़ें, हाल ही में बनाय गया शहीद स्मारक, सीवन नदी पर पुल विकास के जीते जागते उदाहरण है। इसी तरह आष्टा व्यापारिक हब बन चुका है। इसके विपरीत इछावर के नेता आज भी पुरानी परंपराओं और व्यक्तिगत संपर्क के नाम पर वोट बटोरने में लगे हैं।
सोशल मीडिया वाली राजनीति से नाराजगी
युवाओं ने तंज कसते हुए कहा कि शिक्षा, स्वास्थ्य और बुनियादी ढांचे पर काम करने के बजाय जनप्रतिनिधियों का ध्यान इस बात पर ज्यादा रहता है कि वे किस सामाजिक कार्यक्रम में शामिल हुए। युवाओं का कहना है कि अब समय आ गया है कि जनप्रतिनिधि अपनी प्राथमिकताएं बदलें वरना बेरोजगारी और पिछड़ेपन की मार झेल रहा इछावर का युवा आने वाले समय में अपना रास्ता खुद चुनने को मजबूर होगा।


