सीहोर भाजपा में ‘सामाजिक मनमुटाव’ की कसक…!

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सीहोर। सीहोर विधानसभा क्षेत्र में भाजपा के लिए सामाजिक तालमेल बिठाना बड़ी चुनौती बनता जा रहा है। बीते कुछ महीनों पहले क्षेत्र में हुआ एक सामाजिक मनमुटाव भले ही ऊपरी तौर पर शांत नजर आ रहा हो, लेकिन इसकी टीस अब पार्टी के भीतर ही दिखने लगी है। ताजा मामला बीजेपी के कार्यक्रम का है, जिसमें एक विशेष समाज से ताल्लुक रखने वाले भाजपा जिला पदाधिकारियों को आमंत्रित तक नहीं किया गया। इस अनदेखी के बाद संगठन के भीतर खींचतान और बढ़ गई है।
दरअसल सीहोर विधानसभा के ये दोनों ही प्रमुख समाज पारंपरिक रूप से भारतीय जनता पार्टी के मजबूत वोट बैंक माने जाते रहे हैं। कुछ समय पहले हुआ मनमुटाव पूरे प्रदेश में सुर्खियों में आ गया था। कांग्रेस के प्रादेशिक नेता तक समाज विशेष के बीच पहुंचे थे। गांव में बड़ी रैली निकाली और बहिष्कार जैसी बातें सामने आईं थी, तब भी भाजपा के रणनीतिकारों को पसीने छूट गए थे। अब वही कड़वाहट भाजपा के कार्यक्रमों में दूरियों के रूप में साफ झलक रही है।
नाराजगी और अनदेखी बनी सिरदर्द
हालिया कार्यक्रम में जिला पदाधिकारियों को न बुलाना चर्चा का विषय बना हुआ है। पीडि़त पक्ष के पदाधिकारियों में इस बात को लेकर गहरी नाराजगी है कि संगठन की मजबूती के बजाय उन्हें हाशिए पर धकेला जा रहा है। वहीं पार्टी के बड़े नेताओं को इस बात की चिंता सता रही है कि यदि समय रहते दोनों पक्षों को एक मेज पर नहीं बिठाया गया तो इसका सीधा असर आगामी चुनावों के परिणामों पर पड़ेगा।
वोट बैंक खिसकने का डर
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इस मनमुटाव का फायदा कांग्रेस उठाने की कोशिश में है। यदि भाजपा का यह कोर वोट बैंक आपस में उलझा रहा या पार्टी से छिटका तो समीकरण बदल सकते हैं। फिलहाल भाजपा जिला नेतृत्व इस डैमेज कंट्रोल की कोशिश में है कि कैसे इन दोनों समाजों के बीच की खाई को भरा जाए और संगठन में दोबारा एकजुटता लाई जाए।