सीहोर। जिले में प्रशासनिक अधिकारियों की लापरवाही इस कदर बढ़ गई है कि अब वे कलेक्टर के निर्देशों को भी गंभीरता से नहीं ले रहे हैं। हाल ही में इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पानी के कारण हुई 29 मौतों की हृदय विदारक घटना से सबक लेते हुए कलेक्टर बालागुरू के. ने जिले भर में ‘जल सुनवाई’ आयोजित करने के कड़े निर्देश दिए थे, लेकिन उनके अधीनस्थ अमले ने इन आदेशों को ठंडे बस्ते में डाल दिया है।
बता दें बीती 19 जनवरी को जिला पंचायत सभाकक्ष में आयोजित समय सीमा की बैठक के दौरान कलेक्टर ने स्पष्ट रूप से कहा था कि जिले की चारों विधानसभाओं सीहोर, आष्टा, इछावर और बुदनी में जल संबंधी समस्याओं के त्वरित समाधान के लिए विशेष ‘जल सुनवाई’ आयोजित की जाए। कलेक्टर की मंशा थी कि पेयजल आपूर्ति, गिरते जलस्तर, खराब हैंडपंप और ठप पड़ी नल-जल योजनाओं से जुड़ी शिकायतों का मौके पर ही निराकरण हो, ताकि किसी भी अप्रिय स्थिति से बचा जा सके।
अफसरों की लापरवाही, कागजों तक सिमटे आदेश
हैरानी की बात यह है कि कलेक्टर के इन आदेशों के बावजूद जिले में कहीं भी जल सुनवाई का आयोजन नहीं किया गया। जमीनी स्तर पर काम करने वाले अधिकारियों और संबंधित विभागों ने आपसी समन्वय बनाने के बजाय चुप्पी साध ली। इंदौर की घटना के बाद जहां प्रशासन को अत्यधिक सतर्क होना चाहिए था, वहीं सीहोर के जिम्मेदार अधिकारी इसे हल्के में ले रहे हैं।
पुरानी पाइप लाइनों से मंडरा रहा है खतरा
जिले में पेयजल आपूर्ति का बुनियादी ढांचा बेहद पुराना और जर्जर हो चुका है। सीहोर शहर सहित ग्रामीण इलाकों में दशकों पुरानी पाइप लाइनों के जरिए पानी की सप्लाई की जा रही है। कई जगहों पर सीवरेज और पानी की पाइप लाइनें आपस में मिल जाने या जंग लगने के कारण गंदे और जहरीले पानी की शिकायतें आती रहती हैं।
जनता की सुरक्षा के साथ खिलवाड़
कलेक्टर ने निर्देश दिए थे कि आमजन की समस्याएं मौके पर सुनकर तत्काल कार्रवाई की जाए ताकि लोगों को राहत मिले, लेकिन धरातल पर सन्नाटा पसरा है। अब सवाल यह उठता है कि क्या जिले के आला अधिकारी किसी बड़ी अनहोनी का इंतजार कर रहे हैं।
मुख्यालय पर ही बने हालात
बता दें जिला मुख्यालय पर ही गदें पानी के हालात बन चुके हैं। शहर के कस्बा स्थित वार्ड क्रमांक 30 में नागरिकों ने गंदे पानी की शिकायत की थी। जिस पर मौके पर पहुंचे नगर पालिका के सीएमओ को भी स्थानीय नागरिकों ने नलों से आ रहे गंदे पानी से अवगत कराया था। बावजूद जिले भर में जल सुनवाई को लेकर अनदेखी की जा रही है।


