सीहोर। मध्यप्रदेश सहित जिले में एक बार फिर कुदरत का कहर किसानों पर टूटा है। सीहोर सहित पड़ोसी जिले शाजापुर और प्रदेश के कई हिस्सों में हुई बेमौसम बारिश और भीषण ओलावृष्टि ने गेहूं की लहलहाती फसल को मिट्टी में मिला दिया है। खेतों में बिछी फसल को देखकर किसानों की आंखों से आंसू थम नहीं रहे हैं। इस बीच प्रदेश सरकार ने प्रभावितों को ढांढस बंधाते हुए तत्काल राहत का भरोसा दिया है।
तबाही का सबसे दर्दनाक मंजर सीहोर के ग्राम पीलूखेड़ी में देखने को मिला। यहां के किसान हनुमत सिंह मेवाड़ा अपनी 8 एकड़ की गेहूं की फसल को जमीन पर बिछा देख फूट फूटकर रो पड़े। हनुमत ने बताया कि उन पर बैंक का 3 लाख रुपये का कर्ज है। अब फसल बर्बाद होने के बाद उनके सामने परिवार का पेट पालने और कर्ज चुकाने का गहरा संकट खड़ा हो गया है। बता दें यह कहानी अकेले हनुमत की नहीं, बल्कि पीलूखेड़ी, पीपलनेर, ग्वाली और झंडी जैसे दर्जनों गांवों के किसानों की है।
राजस्व मंत्री का बड़ा बयान, संकट में साथ है सरकार
फसलों के नुकसान पर राजस्व मंत्री करण सिंह वर्मा ने कड़ा रुख अपनाते हुए स्पष्ट किया है कि सरकार इस आपदा पर पैनी नजर रखे हुए है। मंत्री वर्मा ने कहा यह किसानों की अपनी सरकार है। हमने प्रदेश के सभी कलेक्टर्स को निर्देश दिए हैं कि राजस्व अमला तुरंत फील्ड पर उतरे और नुकसान का सर्वे शुरू करे। किसी भी किसान को घबराने की जरूरत नहीं है, हर संभव मदद की जाएगी।
बीमा और मुआवजे की मांग
समाजसेवी एवं किसान नेता एमएस मेवाड़ा ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान से गुहार लगाई है कि आरबीसी 6.4 के तहत जल्द मुआवजा वितरण सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि सोयाबीन की फसल बर्बाद होने पर किसानों को मात्र 5000 रुपये थमा दिए गए थे, जो भारी नुकसान के मुकाबले बेहद कम थे। मेवाड़ा ने मांग की है कि किसानों के केसीसी से काटे जाने वाले प्रीमियम के बदले उन्हें फसल बीमा का पूरा लाभ समय पर मिले।
इन गांवों में सबसे ज्यादा नुकसान
सीहोर जिला: ग्राम पीलूखेड़ी, पीपलनेर, आष्टा के ग्वाली, गुराडिय़ा वर्मा और पड़ोसी जिले शाजापुर के ग्राम चांदनी, हनुमतखेड़ा, झंडी एवं आसपास के अन्य गांवों में तेज आंधी के कारण गेहूं की फसल खेतों में आड़ी पड़ गई है और ओलों की वजह से बालियां टूटकर बिखर गई हैं, जिससे पैदावार में भारी गिरावट की आशंका है।


