सीहोर। एक दिन बाद हम 77वां गणतंत्र दिवस मनाने रहे हैं तो सीहोर शहर के बीचों-बीच स्थित शासकीय उत्कृष्ट विद्यालय की इमारत गर्व से सिर उठाए खड़ी है। करीब 190 साल पुरानी यह ऐतिहासिक बिल्डिंग केवल ईंट-पत्थरों का ढांचा नहीं, बल्कि भारत की गुलामी से लेकर आजादी के सूर्योदय तक की गवाह है। जिस इमारत में कभी अंग्रेज बैठकर भारत को गुलाम बनाए रखने की रणनीति बुनते थे आज वहीं से देश का भविष्य छात्र गढ़ा जा रहा है।
इस भव्य इमारत का निर्माण 19वीं शताब्दी के मध्य 1835-1850 के बीच अंग्रेजों ने करवाया था। उस दौर में सीहोर ब्रिटिश पॉलिटिकल एजेंट का मुख्यालय था। यह बिल्डिंग तब पॉलिटिकल एजेंट का निवास और कार्यालय हुआ करती थी। ऐतिहासिक दस्तावेजों के मुताबिक यहां ब्रिटिश सैन्य अधिकारियों का मिलिट्री मेस और क्लब भी संचालित होता था, जहां अंग्रेज अधिकारी अपनी रणनीतिक बैठकें और मनोरंजन किया करते थे।
वास्तुकला: गॉथिक और औपनिवेशिक शैली का मेल
स्कूल की विशाल इमारत अपनी अनूठी वास्तुकला के लिए जानी जाती है। गॉथिक शैली में बनी इसकी दीवारें इतनी मोटी हैं कि भीषण गर्मी में भी अंदर का तापमान काफी कम रहता है। इसके ऊंचे मेहराबदार दरवाजे, विशाल खंभे और रोशनी के लिए बनाए गए विशेष झरोखे आज भी पर्यटकों और इतिहासकारों को आकर्षित करते हैं। यह पूरी इमारत सीहोर छावनी का मुख्य केंद्र हुआ करती थी।
1857 की क्रांति और आजादी का सफर
रोचक तथ्य यह है कि जिस मैदान में आज बच्चे खेलते हैं, उसी के आसपास 1857 की क्रांति के दौरान भारतीय सैनिकों ने सिपाही बहादुर सरकार बनाने और अंग्रेजों के खिलाफ विद्रोह की योजना तैयार की थी। आजादी मिलने के बाद सरकार ने इस ऐतिहासिक सैन्य परिसर को शिक्षा के मंदिर में बदलने का क्रांतिकारी निर्णय लिया।
आज है सीहोर का उत्कृष्ट स्कूल
कभी अंग्रेजों के प्रशासनिक कार्यों का केंद्र रही यह बिल्डिंग आज जिले के उत्कृष्ट विद्यालय के रूप में पहचानी जाती है। जिला मुख्यालय सहित आसपास के अंचलों से मेद्यावी विद्यार्थी यह अध्ययन करते हैं सबसे खास बात यह है कि प्रतिशत (प्रावीण्य सूची) के आधार पर चयन होता है।


