सीहोर। आमतौर पर राजनीति में विपक्ष का मुकाबला सत्ताधारी दल से होता है, लेकिन सीहोर जिले में सियासत इसके उलट है, यहां विपक्षी दल कांग्रेस का मुकाबला सत्ताधारी भाजपा से नहीें, बल्कि एफआईआर से नजर आता है, जिसका प्रत्यक्ष उदाहरण यह है कि महज 5 महीने में ही 4 एफआईआर के माध्यम से 9 कांग्रेसियों पर केस दर्ज हो चुके हैं।
बता दें जिले में भले ही अभी कोई चुनाव न हो, लेकिन राजनीति चरम पर है। हालांकि इस सियासत में आरोप-प्रत्यारोप, धरना प्रदर्शन से ज्यादा एफआईआर चर्चा में बनी हुई है। पिछले 5 महीनों के घटनाक्रम पर नजर डालें तो सितंबर 2025 से लेकर 21 जनवरी के बीच जिले के 9 कांग्रेसी नेताओं और कार्यकर्ताओं पर मुकदमे दर्ज हो चुके हैं।
सितंबर से शुरू हुआ श्री गणेश
कांग्रेस कार्यकर्ताओं पर एफआईआर दर्ज होने की शुरुआत सितंबर महीने की पहली तारीख को हुई थी। भाजपा कार्यकर्ता, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनकी माताजी पर की गई कथित टिप्पणी के विरोध में बस स्टैंड स्थित कांग्रेस कार्यालय के सामने राहुल गांधी का पुतला फूंकने पहुंचे थे। इस दौरान दोनों पक्ष आमने-सामने आ गए। विवाद गाली-गलौज और धक्का-मुक्की तक पहुंच गया। पुलिस ने बीच-बचाव तो किया, लेकिन भाजपा जिला अध्यक्ष नरेश मेवाड़ा और विधायक सुदेश राय की मौजूदगी में कांग्रेस नेता पंकज शर्मा के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया गया।
साल की शुरुआत से ही एफआईआर
इधर साल 2026 की शुरुआत ही कांग्रेस के लिए कानूनी चुनौतियों भरी रही। महज 15 दिनों के भीतर तीन बड़े मामले सामने आए, जिनमें एफआईआर दर्ज हुई। सबसे पहली एफआईआर कांग्रेस जिलाध्यक्ष राजीव गुजराती के भाई पर दर्ज हुई। दरअसल, हाऊसिंग बोर्ड में पेयजल, ब्रिज समस्या को लेकर अभिषेक गुजराती के मुखर होने पर एफआईआर दर्ज हुई। इसी तरह 9 जनवरी को शासकीय पीजी कॉलेज (प्रधानमंत्री एक्सीलेंस कॉलेज) में स्टाफ की शिकायत पर युवा कांग्रेस जिलाध्यक्ष देवेंद्र ठाकुर, प्रदेश सचिव हरिओम सिसोदिया, यश यादव और तनिश त्यागी पर एफआईआर हुई।
पार्षद सहित 4 पर एफआईआर
इधर एक दिन पहले जिले के आष्टा में भाजपा नेत्री संध्या बजाज की शिकायत पर वार्ड क्रमांक 6 के पार्षद मेहमूद शाह सहित चार कार्यकर्ताओं डंगू उर्फ वाहिद, हलीम शाह, कल्लू पर अभद्रता का मामला दर्ज हुआ। विवाद मतदान केंद्र पर आपत्ति फॉर्म जमा करने के दौरान हुआ था।
भाजपा का अभेद्य किला है जिला
बता दें जिला लंबे समय से भाजपा का मजबूत गढ़ रहा है। चारों विधानसभा सीटों पर भाजपा विधायक काबिज हैं। जिले की इछावर विधानसभा सीट से राजस्व मंत्री करण सिंह वर्मा पिछले 40 सालों से विधायक हैं, इस दौरान महज एक कार्यकाल में कांग्रेस काबिज हुई। इसी तरह सीहोर विधानसभा सीट पर भी कांग्रेस करीब 35-40 सालों से तरस रही है। बुदनी सीट भी भाजपा का अभेद्य किला मानी जाती है। इसी तरह आष्टा भी लंबे समय से भाजपा के ही खाते में है।
विपक्ष भी आर-पार के मूड में
भाजपा का मजबूत किला होने के बावजूद विपक्षी यानी कांग्रेसी जिले में पूरी तरह से सक्रिय मोड में आ गई है। धरना, आंदोलन और प्रदर्शनों के जरिए कांग्रेस आमजनों के बीच पहुंच रही है। कांग्रेस की सक्रियता का यह परिणाम रहा कि बीते साल हुए बुदनी विधानसभा सीट के उपचुनाव में भाजपा को 90 हजार मतदाताओं का नुकसान उठाना पड़ा।
यह तो खुली अराजकता है
कांग्रेसियों पर हो रही एफआईआर को लेकर कांग्रेस जिला अध्यक्ष राजीव गुजराती ने कहा कि यह पूरी तरह अराजकता है। हमारे कार्यकर्ताओं को चुन-चुनकर टारगेट किया जा रहा है। मेरे भाई अभिषेक पाटीदार पर भी केस दर्ज किया गया। अगर एनएसयूआई कार्यकर्ता समस्याओं के लिए प्राचार्य के पास नहीं जाएंगे तो कहां जाएंगे, एसआईआर पर अगर किसी को आपत्ति है तो वह बीएलओ के पास ही जाएगा, लेकिन भाजपा डराने के लिए एफआईआर का सहारा ले रही है।


