भक्ति की शक्ति, सहस्त्र चंडी महायज्ञ में मंत्रोच्चार के साथ दी गई 5.10 लाख आहुतियां

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सीहोर। गंज स्थित करोली माता मंदिर में गुप्त नवरात्रि के पावन अवसर पर आस्था का सैलाब उमड़ रहा है। दस दिवसीय सहस्त्र चंडी महायज्ञ के चौथे दिन गुरुवार को यज्ञाचार्य महादेव शर्मा के मार्गदर्शन में 45 जोड़ों सहित मुख्य यजमानों ने माता रानी के दरबार में 5 लाख 10 हजार आहुतियां अर्पित कीं। यज्ञ की अग्नि और मंत्रों की गूंज से पूरा क्षेत्र भक्तिमय हो गया है, वहीं शाम को सतरंगी रोशनी और भजनों की प्रस्तुति ने श्रद्धालुओं का मन मोह लिया।
गुरुवार को 45 जोड़ों के अलावा कार्यक्रम के अध्यक्ष विवेक राठौर, मुख्य यजमान सूत्रधार तरुण राठौर ने यज्ञ में आहुतियां देकर क्षेत्र में सुख समृद्धि की कामना की। यज्ञ में देर शाम को बड़ी संख्या में पहुंचे श्रद्धालुओं ने यज्ञ मंडप में सतरंगी रोशनी को देखकर आकर्षित किया। इस संबंध में महायज्ञ के मीडिया प्रभारी प्रदीप समाधिया ने बताया कि क्षेत्र में प्रथम अवसर है कि सहस्त्र चंडी महायज्ञ का आयोजन संयुक्त मां कालका उत्सव समिति और सभी शहरवासियों की ओर से किया जा रहा है। यज्ञाचार्य पंडित श्री शर्मा ने बताया कि मां दुर्गा के चौथे स्वरूप कुष्माण्डा की पूजा की जाती है। सनातन धर्म में नवरात्रि पर शक्ति की साधना का बहुत अधिक महत्व होता है। आज के दिन मां कूष्मांडा की पूजा अर्चना की जाती है। हिंदू मान्यता के अनुसारए दुर्गा मां के इस रूप की आराधना करने से देवी आशीष प्रदान करती हैं और सभी दुखों का नाश होता है। हिंदू पौराणिक कथाओं के अनुसार मां कूष्माण्डा की मुस्कान की एक झलक ने पूरे ब्रह्मांड का निर्माण किया। इन्हें अष्टभुजा देवी के रूप में भी जाना जाता है। मां कूष्माण्डा का वाहन सिंह है और आदिशक्ति की 8 भुजाएं हैं। इनमें से 7 हाथों में कमल.पुष्पए अमृतपूर्ण कलश, कमण्डल और कुछ शस्त्र जैसे धनुष, बाण, चक्र तथा गदा हैं। जबकि आठवें हाथ में सभी सिद्धियों और निधियों को देने वाली जप माला है। मान्यता है कि माता को कुम्हड़े की बलि बेहद प्रिय है, वहीं कुम्हड़े को संस्कृत में कूष्माण्डा कहते हैं।