डर के साए में किसान: कई गांवों में तेंदुए का आतंक, वन विभाग की सुस्ती से किसान नाराज

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सीहोर। जिले के ग्रामीण अंचलों में इन दिनों तेंदुए की दहशत इस कदर हावी है कि किसानों का खेतों पर जाना दूभर हो गया है। ग्राम चंदेरी, रामखेड़ी, ताकीपुर और पिपलिया मीरा के किसान पिछले एक महीने से तेंदुए की मौजूदगी के कारण दहशत के साये में जी रहे हैं। वन विभाग की कथित लापरवाही से नाराज होकर किसानों ने समाजसेवी एमएस मेवाड़ा के नेतृत्व में विरोध प्रदर्शन किया और विभाग के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।
बता दें वर्तमान में गेहूं की फसल की सिंचाई का काम जारी है। सिंचाई के लिए किसानों को अक्सर रात के समय खेतों पर जाना पड़ता है। ग्रामीणों का कहना है कि क्षेत्र में तेंदुए और बाघ की आहट के कारण अब अकेले खेत पर जाना जान जोखिम में डालने जैसा है। किसानों का कहना है कि अगर हम डर के मारे खेत पर नहीं जाएंगे तो हमारी फसल सूख जाएगी और परिवार भूखा मरेगा और अगर खेत पर जाते हैं तो खूंखार जानवर का डर है।
वीडियो के बाद भी विभाग की नींद नहीं खुली
ग्रामीणों का आरोप है कि पिछले एक महीने से लगातार चंदेरी और रामखेड़ी जैसे गांवों में तेंदुए के पदचिह्न देखे जा रहे हैं। हद तो तब हो गई जब हाल ही में शाम करीब 4 बजे एक तेंदुआ प्रत्यक्ष रूप से दिखाई दिया, जिसका वीडियो भी ग्रामीणों ने बनाया है। साक्ष्य मौजूद होने के बावजूद वन विभाग द्वारा अब तक तेंदुए को पकडऩे के लिए पिंजरा लगाने या कोई ठोस रेस्क्यू ऑपरेशन चलाने जैसे कदम नहीं उठाए गए हैं।
किसानों ने किया प्रदर्शन, दी चेतावनी
वन विभाग की इसी निष्क्रियता से आक्रोशित होकर बड़ी संख्या में ग्रामीण और किसान सडक़ पर उतरे। समाजसेवी एमएस मेवाड़ा ने कहा कि प्रशासन किसी बड़ी अनहोनी का इंतजार कर रहा है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि शीघ्र ही वन विभाग की टीम ने सक्रियता नहीं दिखाई और तेंदुए को पकडऩे के इंतजाम नहीं किए तो ग्रामीण उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होंगे।
किसानों की मांग, जल्दी लगे पिंजरा
किसानों ने वन विभाग के उच्च अधिकारियों से मांग की है कि प्रभावित गांवों के पास तत्काल शिकार पकडऩे के लिए पिंजरे लगाए जाएं। प्रभावित क्षेत्रों में वन विभाग की टीम द्वारा गश्त बढ़ाई जाए। रात के समय बिजली सप्लाई और सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए जाएं।