इछावर में जमीनों का बड़ा खेल, जिस जमीन को अफसरों ने बताया शासकीय, अब उसी पर निजी कब्जा दिलाने की तैयारी…

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सीहोर। जिले की इछावर तहसील के अंतर्गत आने वाले ग्राम कुड़ी में बेशकीमती सरकारी जमीन को लेकर बड़ा खेल सामने आया है। हैरानी की बात यह है कि जिस जमीन को राजस्व विभाग के आला अधिकारी एसडीएम और तहसीलदार अपनी ही जांच रिपोर्ट में शासकीय घोषित कर चुके हैं, अब उसी जमीन पर एक निजी व्यक्ति को कब्जा दिलाने की तैयारी कर ली गई है। इसके लिए बाकायदा सूचना पत्र (नोटिस) जारी कर ग्रामीणों को बेदखल करने की चेतावनी दी गई है।
क्या है पूरा मामला
ग्राम कुड़ी के खसरा नंबर 31, 32, 33, 34 और 35 की करीब 61.96 एकड़ (25 हेक्टेयर) जमीन राजस्व रिकॉर्ड में शासकीय भूमि के रूप में दर्ज है। पूर्व में एसडीएम और तहसीलदार इछावर ने पटवारी प्रतिवेदन के आधार पर इसे सरकारी माना था। तहसीलदार की रिपोर्ट में स्पष्ट उल्लेख था कि खसरा नंबर 32/1 वर्ष 1959 से ही शासकीय रही है और यह (अहस्तांतरणीय) जिसे बेचा न जा सके है।
अचानक बदला प्रशासन का रुख
सरकारी घोषित होने के बावजूद अब तहसीलदार कार्यालय ने भोपाल निवासी विनीत गर्ग को करीब 5.722 हेक्टेयर भूमि पर कब्जा दिलाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। राजस्व निरीक्षक और पटवारी द्वारा 9 जनवरी 2026 को जारी नोटिस के अनुसार 16 जनवरी को सुबह 11 बजे विनीत गर्ग को कब्जा दिलाया जाएगा। इसके लिए वहां काबिज ग्रामीण जब्बार, रानी बाई, लीलाबाई, उर्मिलाबाई, कृष्णगोपाल और महेंद्र को बेदखल करने की तैयारी है।
1959 से अब तक का उलझा रिकॉर्ड
जमीन का इतिहास काफी पेचीदा है। 1959-60 में यह जमीन सइयद इजहर हुसैन के नाम थी, जो बाद में सीलिंग एक्ट और चकबंदी की प्रक्रियाओं से गुजरी। रिकॉर्ड बताते हैं कि 2006 से 2014 के बीच कागजों में हेरफेर कर इसे केएस इंफ्रास्ट्रक्चर दिल्ली और विनीत गर्ग के नाम दर्ज कराने की कोशिश की गई। हालांकि तहसीलदार की ही पिछली रिपोर्ट कहती है कि यह जमीन अहस्तांतरणीय है, यानी इसका मालिकाना हक किसी निजी व्यक्ति को नहीं दिया जा सकता।
भ्रष्टाचार की बू, कलेक्टर से शिकायत
ग्रामीणों का आरोप है कि करोड़ों की इस जमीन को निजी हाथों में सौंपने के लिए अधिकारियों और भू-माफियाओं के बीच मिलीभगत हुई है। इस पूरे मामले की लिखित शिकायत कलेक्टर से की गई है। सवाल यह उठ रहा है कि जब प्रशासन खुद इसे सरकारी मान चुका है तो फिर निजी व्यक्ति को कब्जा दिलाने के लिए इतनी जल्दबाजी क्यों की जा रही है.
इनका कहना है
ग्राम कुड़ी की यह जमीन पहले निजी थी, फिर सीलिंग एक्ट में शासकीय हुई। बाद में इसके पट्टे भी दिए गए। हम 1959 से पुराना रिकॉर्ड देख रहे हैं। यदि जमीन रिकॉर्ड में शासकीय पाई गई तो नियमानुसार कार्रवाई कर इसे वापस सरकारी घोषित किया जाएगा। फिलहाल जो सूचना पत्र दिया गया है, वह सीमांकन के लिए है।
स्वाति मिश्रा, एसडीएम इछावर
इधर इस मामले में तहसीलदार गजेंद्र लोधी से संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन उनसे बात नहीं हो सकी।