भाजपा में ‘सब चंगा सी’ के दावों के बीच, प्रेस विज्ञप्तियों ने खोली गुटबाजी की पोल!

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सीहोर। भारतीय जनता प्रदेश की राजनीति में खुद को सबसे अनुशासित पार्टी कहने वाली भाजपा के भीतर सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है। वैसे तो पार्टी के दिग्गज नेता मंचों से दावा करते हैं कि भाजपा एक परिवार है और यहाँ गुटबाजी का कोई स्थान नहीं है, लेकिन जिले की एक विधानसभा क्षेत्र से जो खबरें और प्रेस विज्ञप्तियां सामने आ रही हैं, वे कुछ और ही कहानी बयां कर रही हैं।
दरअसल, जिले की एक प्रमुख विधानसभा सीट पर तीन बड़े नेताओं का वर्चस्व है। इन तीनों नेताओं की ओर से मीडिया को जारी की जाने वाली प्रेस विज्ञप्तियां अब चर्चा का विषय बन गई हैं। मजेदार बात यह है कि एक ही पार्टी के होने के बावजूद इन विज्ञप्तियों में सामूहिकता कहीं नजर नहीं आती। तीनों ही धड़ों की ओर से जारी होने वाली खबरों में केवल अपने-अपने चहेते के नाम और फोटो को प्राथमिकता दी जाती है।
अपनों को तवज्जो, परायों से दूरी
राजनीतिक गलियारों में इस बात को लेकर चटखारे लिए जा रहे हैं कि अगर भाजपा में गुटबाजी नहीं है तो एक-एक कार्यक्रम की तीन अलग.अलग विज्ञप्तियां क्यों आती हैं और उन विज्ञप्तियों में एक-दूसरे गुट के नेताओं के नाम को प्राथमिकता क्यों दी जाती है।
कार्यकर्ताओं में संशय
नेताओं की इस कागजी जंग को देखकर जमीन पर काम करने वाला आम कार्यकर्ता असमंजस में रहते हैं कि किसके साथ रहे। वहीं राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इन प्रेस विज्ञप्तियों ने भाजपा के अनुशासन के उस गुब्बारे में पिन चुभा दी है, जिसे फुलाने का काम बड़े नेता सालों से कर रहे थे। इन विज्ञप्तियों के माध्यम से होने वाली अदृश्य ब्रांडिंग अब इतनी स्पष्ट हो चुकी है कि चाय की दुकानों से लेकर कटिंग की दुकानों पर लोग चर्चा करते नजर आते हैं कि ‘दावे अनुशासन के’ पर दर्शन गुटबाजी के।