सीहोर। जिला अस्पताल में प्रसव के दौरान हुई लापरवाही और उसके बाद एक बेबस पिता द्वारा सडक़ किनारे अपनी नवजात बच्ची का दाह संस्कार करने के मामले ने अब सामाजिक तूल पकड़ लिया है। सप्ताह भर पहले हुई इस घटना पर प्रशासन की चुप्पी से नाराज अखिल भारतीय जाट महासभा आष्टा ने मोर्चा खोल दिया है। समाज ने दो टूक चेतावनी दी है कि यदि सात दिनों के भीतर दोषी स्वास्थ्य कर्मियों पर कार्रवाई नहीं हुई तो पूरा आष्टा बंद कर चक्का जाम किया जाएगा।
मंगलवार को जाट समाज के बड़ी संख्या में सदस्यों ने अनुविभागीय अधिकारी को राज्यपाल के नाम ज्ञापन सौंपा। समाज के प्रतिनिधियों का कहना है कि 2 जनवरी को भैरुंदा निवासी संतोष जाट की पत्नी ममता के साथ जो हुआ, वह केवल चिकित्सा लापरवाही नहीं बल्कि मानवता की हत्या है। अस्पताल में डॉक्टरों की अनुपस्थिति और बाद में पुलिस व प्रशासन द्वारा पीडि़त परिवार को सडक़ पर बेसहारा छोड़ देना गलत है।
क्या था मामला
गौरतलब है कि जिला अस्पताल में ममता जाट ने एक बेटी को जन्म दिया था, परिजनों का आरोप है कि उचित देखरेख के अभाव में उसकी मौत हो गई थी। न्याय न मिलने पर परिजनों ने धरना दिया, जिसे पुलिस ने हटवा दिया। साधन विहीन दंपत्ति कड़ाके की ठंड में पूरी रात शव लेकर क्रिसेंट चौराहे पर बैठे रहे। अंतत: कोई रास्ता न देख पिता ने सुबह सडक़ किनारे ही लकडिय़ां बीनकर अपनी मासूम का अंतिम संस्कार कर दिया। सोशल मीडिया पर इस बेबसी की तस्वीरें आने के बाद से ही आक्रोश पनप रहा था।
अल्टीमेटम, कार्रवाई नहीं तो चक्का जाम
ज्ञापन सौंपने के दौरान अखिल भारतीय जाट महासभा ने अपनी मांगें स्पष्ट रखी हैं कि प्रसव के समय ड्यूटी से गायब डॉक्टरों और लापरवाह नर्सों पर तत्काल कार्रवाई हो। इस पूरे प्रकरण की उच्च स्तरीय और निष्पक्ष जांच कराई जाए। पीडि़त गरीब परिवार को हुए मानसिक और शारीरिक कष्ट के लिए न्याय मिले।
समाजजनों ने दी चेतावनी
जाट समाज के पदाधिकारियों ने कहा कि यह ज्ञापन सिर्फ सूचना नहीं, बल्कि चेतावनी है। यदि 7 दिनों के भीतर प्रशासन ने ठोस कदम नहीं उठाए तो समाजजन ‘नगर बंद’ का आह्वान करेंगे और इसकी पूरी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।


