अजब-गजब: शहीद भगत सिंह का ‘पुनर्जन्म’ या राजनीति, आष्टा में एक ही प्रतिमा का दोबारा होगा अनावरण

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सीहोर। महान क्रांतिकारी शहीद भगत सिंह ने देश के लिए एक बार जान दी थी, लेकिन आष्टा के ‘शहीद भगत सिंह कॉलेज’ प्रशासन की मेहरबानी देखिए कि यहां उनकी प्रतिमा का ‘बलिदान’ बार-बार सियासी सुविधा के अनुसार लिया जा रहा है। जिस प्रतिमा का अनावरण 15 दिन पहले हो चुका है, अब उसी का दोबारा ‘शुद्धिकरण’ या कहें कि भव्य अनावरण आज शुक्रवार फिर से होने जा रहा है।
बता दें पिछले दो साल से शहीद की प्रतिमा कॉलेज परिसर में कभी बरसाती तो कभी पुराने पर्दों के पीछे छिपी अपनी ‘आजादी’ का इंतजार कर रही थी। कॉलेज प्रशासन इसे ढकने में इतनी शिद्दत दिखा रहा था मानो प्रतिमा नहीं, कोई राज छिपा हो। जब एनएसयूआई ने आंदोलन छेड़ा और छात्र नेता अंशुल ठाकुर ने खुद अनावरण की चेतावनी दी तो आनन फानन में 15 दिन पहले पर्दा हटाकर विधिवत अनावरण कर दिया गया। फोटो खिंची, खबरें छपीं और शहीद की प्रतिमा को खुली हवा नसीब हुई।
शायद ‘अतिथि’ कम पड़ गए थे!
अब सवाल यह उठ रहा है कि जो प्रतिमा पिछले दो हफ्ते से खुली है, जिसका अनावरण हो चुका है, उसका श्री.लॉन्च क्यों? चर्चा है कि पिछला अनावरण शायद सियासी प्रोटोकॉल में फिट नहीं बैठा। इसलिए अब आज सुबह 11 बजे फिर से ताम-झाम जुटेगा। इस बार मुख्य अतिथि के रूप में एबीवीपी के संगठन मंत्री चेतस सुखाडिय़ां, सांसद महेंद्र सिंह सोलंकी और विधायक गोपाल सिंह इंजीनियर मौजूद रहेंगे।
माफ करना शहीद भगत सिंह जी!
आम जनता के बीच यह चर्चा का विषय है कि क्या शहीदों के सम्मान से ज्यादा बड़ा अतिथियों का नाम हो गया है, जो प्रतिमा जनता और छात्रों के लिए पहले ही समर्पित हो चुकी है, उसे फिर से अनावरण की श्रेणी में डालना व्यवस्था की कार्यप्रणाली पर गहरा तंज है। लोग कह रहे हैं कि माफ करना भगत सिंह जी, आपकी प्रतिमा तब तक अनावरित मानी जाएगी जब तक कि सही ‘माननीयों’ के हाथों फीता न कट जाए।