सीहोर। कांग्रेस के चाणक्य कहे जाने वाले पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह इन दिनों अपने पुराने अंदाज में हैं। 78 की उम्र में भी युवाओं जैसी फुर्ती दिखाते हुए वे बीजेपी के अभेद्य किले इछावर को भेदने निकले हैं। लेकिन, उनकी इस सादगी और रणनीति पर अब कांग्रेस के भीतर ही ‘अपनों’ ने सवाल उठा दिए हैं।
राजस्व मंत्री करण सिंह वर्मा के प्रभाव वाले इछावर में पैठ बनाने के लिए दिग्विजय सिंह ने रविवार की रात ग्राम खेरी में एक साधारण कार्यकर्ता मांगीलाल पटेल के घर बिताई। उन्होंने जमीन पर बैठकर गुटबाजी खत्म करने का मंत्र दिया और कार्यकर्ताओं में जोश भरा, लेकिन सिंह का एक किसान परिवार (पिछड़ा वर्ग) के यहां रुकना कांग्रेस के ही पूर्व जिलाध्यक्ष डॉ. बलवीर तोमर को रास नहीं आया। डॉ. तोमर ने मोर्चा खोलते हुए कहा कि दिग्विजय सिंह का चयन गलत था। उनके मुताबिक कांग्रेस का आधार स्तंभ एससी/एसटी और अल्पसंख्यक वर्ग है। दिग्विजय सिंह को इन वर्गों के बीच रुकना चाहिए था, ताकि उन्हें सही संदेश जाता। डॉ. तोमर ने प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी के पक्ष में भी खड़े होकर दिग्विजय सिंह के नजरिए पर असहमति जताई।
यह उनका व्यक्तिगत विचार
हालांकि पूर्व जिलाध्यक्ष डॉ. बलवीर तोमर के इस बयान को पार्टी के नेताओं का समर्थन नहीं मिला। पूर्व जिलाध्यक्ष कैलाश परमार ने इसे डॉ. तोमर का ‘व्यक्ति विचार’ बताया और कहा कि आगामी दौरों में दिग्विजय सिंह अन्य समाज के लोगों के यहां भी रुकेंगे। वहीं पूर्व विधायक शैलेंद्र पटेल ने कहा कि इछावर में सबसे ज्यादा जॉब कार्डधारी हैं, इसलिए इस क्षेत्र को चुना गया है। डॉ. तोमर का यह व्यक्ति विचार है। इस तरह की बातें पार्टी फोरम पर उठना चाहिए।
बीजेपी के गढ़ में मची खलबली
इछावर से पदयात्रा शुरू कर दिग्विजय सिंह ने सीधे केंद्र पर निशाना साधा। उन्होंने मनरेगा से महात्मा गांधी का नाम हटाने को राष्ट्रपिता का अपमान बताया। उनकी इस सक्रियता का असर दिल्ली तक दिखा, जहां केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान को मोर्चा संभालते हुए इसे ‘भ्रष्टाचार बचाओ संग्राम’ करार देना पड़ा। अब देखना यह है कि दिग्विजय सिंह की यह जमीन से जुड़ी राजनीति बीजेपी के किले को कमजोर कर पाती है या पार्टी के भीतर उठते ये अंतर्विरोध कांग्रेस की राह मुश्किल करेंगे।


