सीहोर। विंध्याचल की पहाडिय़ों और पवित्र नर्मदा मैया के आंचल में बसा हमारा सीहोर जिला केवल एक प्रशासनिक इकाई नहीं, बल्कि प्रगति और परंपरा का संगम है। 6,578 वर्ग किलोमीटर में फैले इस जिले की भौगोलिक और सामाजिक संरचना बेहद दिलचस्प है।
गांवों से शहरों तक का सफर जिले को बेहतर ढंग से चलाने के लिए इसे 8 तहसीलों और 5 विकासखंडों में बांटा गया है। जिले में कुल 1,072 गांव हैं, जिनमें से 1,011 गांव आबादी वाले हैं। शहरी व्यवस्था के लिए 2 नगर पालिकाएं और 7 नगर पंचायतें सक्रिय हैं। सुरक्षा की कमान 13 पुलिस थानों और 9 चौकियों के हाथ में है।
खेती-किसानी
जिला मुख्य रूप से कृषि प्रधान जिला है। जिले का कुल फसल क्षेत्र करीब 4.55 लाख हेक्टेयर है। यहां की मिट्टी सोना उगलती है, जिसे नर्मदा, पार्वती, अजनल, कोलार और सीवन जैसी नदियाँ सींचती हैं। जिले में 7 कृषि उपज मंडियां किसानों की मेहनत को बाजार तक पहुंचाती हैं। दिलचस्प बात यह है कि जिले में 43 हजार से ज्यादा बिजली के पंप खेतों की प्यास बुझा रहे हैं।
शिक्षा और स्वास्थ्य
भविष्य की नींव जिले में साक्षरता का प्रतिशत 59.50 है। शिक्षा के उजाले को घर-घर पहुंचाने के लिए 1,265 प्राथमिक विद्यालय, 418 माध्यमिक और 142 हाई व हायर सेकेंडरी स्कूल संचालित हैं। उच्च शिक्षा के लिए 6 कॉलेज और 7 व्यावसायिक संस्थान युवाओं को तैयार कर रहे हैं। स्वास्थ्य सेवाओं की बात करें तो 17 लोक स्वास्थ्य केंद्र और 150 उप केंद्रों के माध्यम से ग्रामीणों को इलाज मिल रहा है।
बुनियादी सुविधाएं और जीवनशैली
पेयजल: जिले के लगभग सभी 1,011 गांवों तक पेयजल सुविधा पहुंच चुकी है, जिसमें 994 गांव हैंडपंप और 70 गांव नल-जल योजना से कवर हैं।
बिजली: जिला प्रशासन के आंकड़ों के अनुसार जिले के 99.7 प्रतिशत गांवों में बिजली पहुंची चुकी है, जो विकास की एक बड़ी उपलब्धि है।
सडक़ें: जिले में पक्की सडक़ों का जाल 950 किलोमीटर से अधिक लंबा है, जो व्यापार और आवागमन को सुगम बनाता है।
पशुधन: खेती के साथ-साथ पशुपालन भी यहां की पहचान है। जिले में 5.72 लाख से अधिक पालतू पशु हैं, जिनके लिए 12 अस्पताल और 29 औषधालय मौजूद हैं।
तापमान का मिजाज
जिले का मौसम भी विविधतापूर्ण है। गर्मी के दिनों मई में पारा 42.4 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच जाता है तो वहीं कड़ाके की ठंड दिसंबर में यह गिरकर 7.9 डिग्री तक आ जाता है। औसतन 1261.1 मिमी वर्षा यहां की धरती को हरा-भरा बनाए रखती है।


