सीहोर। राजधानी भोपाल में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ द्वारा आयोजित सामाजिक सद्भाव बैठक का शुभारंभ हुआ। कार्यक्रम में विश्व पटल पर श्री शिवाय नमस्तुभ्यं के मंत्र की अलख जगाने वाले और सीहोर की शान अंतरराष्ट्रीय कथावाचक पंडित प्रदीप मिश्रा मुख्य अतिथि के रूप में सम्मिलित हुए। कार्यक्रम की शुरुआत सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत और पंडित प्रदीप मिश्रा द्वारा संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर की गई।
इस अवसर पर पंडित प्रदीप मिश्रा का संबोधन आकर्षण का केंद्र रहा। उन्होंने अपने चिर परिचित सरल और ओजस्वी अंदाज में समाज को संबोधित करते हुए सनातन धर्म और देशभक्ति के अंतर्संबंधों पर प्रकाश डाला। पंडित मिश्रा ने कहा कि सनातन धर्म केवल एक पूजा पद्धति नहीं है, बल्कि यह जीवन जीने की कला और राष्ट्र सेवा का मार्ग है। उन्होंने जोर देकर कहा कि जब प्रत्येक सनातनी के मन में अपने धर्म के प्रति गर्व और देश के प्रति समर्पण का भाव जाग्रत होगा, तभी भारत एक बार फिर विश्व गुरु के पद पर आसीन होगा। उनके उद्बोधन के दौरान पंडाल में भक्ति और राष्ट्रवाद का अद्भुत संगम देखने को मिला।
सामाजिक सद्भाव ही भारतीय समाज का मूल स्वभाव: मोहन भागवत
कार्यक्रम में सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने भी अपने विचार साझा किए। उन्होंने पंडित प्रदीप मिश्रा की उपस्थिति की सराहना करते हुए कहा कि भारतीय समाज का मूल स्वभाव ही सामाजिक सद्भाव है। हम विविधता में एकता के सूत्र में बंधे हुए हैं और इसी सद्भाव को बनाए रखना वर्तमान समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है। उन्होंने समाज के हर वर्ग से भेदभाव मिटाकर राष्ट्र निर्माण में जुटने का आह्वान किया। इस महत्वपूर्ण बैठक में संघ के वरिष्ठ पदाधिकारी, गणमान्य नागरिक और भारी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे, जिन्होंने पंडित जी के देशभक्ति और धर्म के संदेश को आत्मसात करने का संकल्प लिया।


