- सीहोर। सियासत में मंचों से तालियों की गडग़ड़ाहट के बीच किए गए वादे अक्सर वक्त के साथ ठंडे बस्ते में चले जाते हैं। कुछ ऐसा ही हाल भोपाल सांसद आलोक शर्मा द्वारा सीहोर के दिव्यांगों से किए गए ‘खास वादे’ का नजर आ रहा है। पांच महीने बीत जाने के बाद भी सांसद महोदय उन दो चेहरों को नहीं खोज पाए हैं, जिन्हें उन्होंने दिव्यांगों की आवाज बनने के लिए अपना ‘सांसद प्रतिनिधि’ बनाने का ऐलान किया था।
बता दें जुलाई महीने में जब सांसद आलोक शर्मा सीहोर दौरे पर आए थे, तब उन्होंने एक बेहद संवेदनशील पहल की घोषणा की थी। उन्होंने कहा था कि वे सीहोर विधानसभा क्षेत्र से दो ऐसे दिव्यांगजनों को अपना प्रतिनिधि ‘सांसद प्रतिनिधि’ नियुक्त करेंगे, जो सीधे तौर पर दिव्यांगों की समस्याओं को उन तक पहुंचाएंगे। मकसद नेक था दिव्यांगों और सत्ता के बीच के फासले को कम करना। लेकिन आज पांच महीने बाद भी यह घोषणा जमीन पर नहीं उतर सकी है।
जिलाध्यक्ष से मांगे थे नाम, पर बात आगे नहीं बढ़ी
सांसद शर्मा ने उस दौरान भाजपा जिलाध्यक्ष नरेश मेवाड़ा से दो योग्य और सेवाभावी नामों की अनुशंसा मांगी थी। उन्होंने स्पष्ट किया था कि ये प्रतिनिधि पद के लालची नहीं बल्कि जनसेवा के प्रति समर्पित होने चाहिए। स्थानीय स्तर पर इस पहल को सीहोर के राजनीतिक इतिहास में एक बड़ी शुरुआत माना जा रहा था, लेकिन अब तक नियुक्तियां न होने से दिव्यांगों में निराशा है।
दिव्यांगों को अब भी ‘सेतु’ का इंतजार
आज भी सीहोर के दिव्यांग अपनी पेंशन, सहायक उपकरण और अन्य सरकारी योजनाओं के लिए भटकने को मजबूर हैं। उन्हें उम्मीद थी कि सांसद प्रतिनिधि नियुक्त होने के बाद उनकी बात सीधे ‘दिल्ली’ तक पहुंचेगी, लेकिन प्रतिनिधि न मिलने के कारण वे आज भी उसी पुरानी व्यवस्था के भरोसे हैं जिसे सांसद महोदय खुद बदलना चाहते थे।


