सीहोर। पूर्व प्रधानमंत्री भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी की जयंती के अवसर पर गुरुवार को आष्टा में उनकी प्रतिमा का अनावरण किया गया। कार्यक्रम के दौरान जब क्रेन की मदद से प्रतिमा को माला पहनाने का प्रयास किया गया, तभी अचानक माला टूटकर नीचे गिर गई। यह देखते ही मौके पर मौजूद लोगों में चर्चा शुरू हो गई और कई लोगों ने इसे प्रतीकात्मक संकेत बताते हुए कहा कि अटल जी को ही यह प्रतिमा पसंद नहीं आई।
दरअसल, आष्टा में स्थापित अटल जी की प्रतिमा को लेकर लंबे समय से विवाद चला आ रहा है। स्थानीय नागरिकों और सामाजिक संगठनों का कहना है कि प्रतिमा अटल जी के व्यक्तित्व, कद-काठी और गरिमा के अनुरूप नहीं है। प्रतिमा के चेहरे और बनावट को लेकर पहले भी सवाल उठते रहे हैं।
अनावरण के दौरान टूटी माला
गुरुवार को अटल जयंती पर आयोजित कार्यक्रम में जनप्रतिनिधि और आम नागरिक मौजूद थे। जैसे ही क्रेन से प्रतिमा को माला पहनाई जा रही थी, माला का एक हिस्सा अचानक टूटकर गिर गया। इस घटना के बाद लोगों में तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आने लगीं। कई लोगों ने इसे महज संयोग बताया, तो वहीं बड़ी संख्या में नागरिकों ने इसे प्रतिमा को लेकर चल रहे असंतोष से जोड़कर देखा।
सीहोर की प्रतिमा ज्यादा सुंदर
स्थानीय लोगों का कहना है कि सीहोर में लगी अटल जी की प्रतिमा अधिक आकर्षक, संतुलित और उनके व्यक्तित्व के अनुरूप है। आष्टा की प्रतिमा की तुलना करते हुए नागरिकों ने कहा कि अटल जी जैसे महान नेता की प्रतिमा में उनकी सौम्यता, ओज और गरिमा साफ झलकनी चाहिए, जो यहां नजर नहीं आती।
जनभावनाओं की अनदेखी का आरोप
लोगों ने आरोप लगाया कि प्रतिमा निर्माण और स्थापना में जनभावनाओं की अनदेखी की गई है। कई नागरिकों ने मांग की है कि इस प्रतिमा की समीक्षा कर विशेषज्ञों की राय ली जाए और जरूरत पड़े तो नई प्रतिमा स्थापित की जाए, ताकि अटल जी के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि दी जा सके।


