पहाडऩुमा सडक़: बिना बेस तैयार हो रहा ढाई करोड़ का मार्ग, इंजीनियर का अजीब तर्क- बेस की जरूरत नहीं!

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  • सीहोर। शहर की जिस सडक़ का इंतजार रहवासी बरसों से कर रहे थे, अब वही उनके लिए मुसीबत का सबब बनने जा रही है। नगर पालिका अध्यक्ष प्रिंस विकास राठौर द्वारा जनता की मांग पर दी गई ढाई करोड़ की सौगात को ठेकेदार और इंजीनियरों की जुगलबंदी ने ‘सफेद हाथी’ बना दिया है। मछली पुल से लुनिया चौराहा तक बन रही इस सडक़ का निर्माण तकनीकी मापदंडों को ताक पर रखकर किया जा रहा है, जिससे रहवासी और दुकानदार तनाव में हैं।
    बता दें करीब एक किलोमीटर लंबे इस मार्ग के निर्माण में तकनीकी घपला साफ नजर आ रहा है। नियम के अनुसार सडक़ निर्माण से पहले मजबूत बेस तैयार किया जाता है, लेकिन यहां सीधे सडक़ बिछाई जा रही है। रहवासी व दुकानदारों ने जब इस पर सवाल उठाए तो जिम्मेदार इंजीनियरों का गैर जिम्मेदाराना जवाब सामने आया कि बेस की जरूरत नहीं है। बिना बेस के बनाई जा रही यह सडक़ कितनी टिकेगी, यह बड़ा सवाल है। इसके अलावा सडक़ को इतना ऊंचा कर दिया गया है कि वह ‘पहाडऩुमा’ नजर आने लगी है। सडक़ की ऊंचाई आसपास की दुकानों, घरों और यहां तक कि मंदिरों की दहलीज से भी ऊपर निकल गई है।
    बिजली खंभे भी नहीं हटवाए
    निर्माण एजेंसी की मनमानी का आलम यह है कि सडक़ के किनारों पर आ रहे बिजली के खंभों को हटाने तक की जहमत नहीं उठाई गई। ठेकेदार ने बिजली कंपनी से समन्वय किए बिना ही खंभों के आसपास निर्माण कार्य शुरू कर दिया है, जो भविष्य में बड़े हादसों को निमंत्रण दे रहा है। ढाई करोड़ की लागत वाली इस सडक़ के चौड़ीकरण 11 मीटर में न तो ड्रेनेज का सही आकलन किया गया और न ही लेवलिंग का ध्यान रखा गया।
    बारिश में जलमग्न होगा पूरा इलाका
    क्षेत्रवासियों का कहना है कि सडक़ को असामान्य रूप से ऊंचा करने के कारण अब ढलान घरों और दुकानों की तरफ हो गई है। आगामी बारिश में सडक़ का सारा पानी लोगों के घर और दुकानों तक पहुंचेगा। स्थानीय निवासियों ने आरोप लगाया कि नगर पालिका के इंजीनियरों की चुप्पी यह बता रही कहीं न कहीं निर्माण एजेंसी को ‘अघोषित संरक्षण’ प्राप्त है।
    भारी न पड़ जाए व्यस्ततम मार्ग की अनदेखी
    मालूम हो कि यह सडक़ रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड और मंडी जैसे महत्वपूर्ण स्थलों को जोड़ती है, जहां रोजाना 5 हजार से अधिक वाहनों का दबाव रहता है। यदि इस व्यस्ततम मार्ग पर गुणवत्ता से समझौता किया गया तो यह न केवल जनता के पैसे की बर्बादी होगी, बल्कि रहवासियों को भी परेशान करेगी।
    बेस की जरुरत नहीं
    इधर जब इस संबंध में नगर पालिका के इंजीनियर विजय कोली से सडक़ की ऊंचाई को लेकर बात की तो उन्होंने बताया कि सडक़ में बेस की जरुरत नहीं है। तय मापदंड के अनुसार ही सडक़ का निर्माण हो रहा है।