सीहोर। भारतीय राजनीति के शिखर पुरुष और पूर्व प्रधानमंत्री भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी की आज जयंती है। देश उन्हें याद कर रहा है, तो सीहोर के वृद्ध नेताओं की आंखों में यादें बसी हैं। सीहोर का नाता अटल जी से सिर्फ एक नेता और जनता का नहीं, बल्कि एक पारिवारिक आत्मीयता का रहा है। यह वह शहर है जिसने अटल जी को कभी हाथी पर बैठाकर पलकों पर बिछाया तो कभी चोटिल होने पर ढाई महीने तक अपनी गोद में सहेज कर रखा।
वयोवृद्धों के अनुसार किस्सा वर्ष 1958-59 का है, जब अटल जी जनसंघ के एक ओजस्वी युवा नेता हुआ करते थे। सीहोर विधानसभा के उपचुनाव में वे एडवोकेट दीवानचंद महाजन के प्रचार के लिए आए थे। प्रचार के दौरान जब उनका मिनी ट्रक अमलाहा की ओर बढ़ रहा था, तभी एक मवेशी के सामने आने से गाड़ी दुर्घटनाग्रस्त हो गई। इस हादसे में अटल जी का पैर गंभीर रूप से फ्रैक्चर हो गया। सीहोर के लोग आज भी याद करते हैं कि कैसे पूरा शहर उनके स्वास्थ्य के लिए दुआएं मांग रहा था।
कभी हाथी, तो कभी ट्रक की सवारी
हादसे के कुछ दिन पहले ही अटल जी को जावर में कार्यकर्ताओं ने बड़े चाव से हाथी पर बैठाकर जुलूस निकाला था। फ्रैक्चर के बाद जब उन्हें अस्पताल ले जाया जा रहा थाए तब दर्द के बीच भी उनकी हाजिरजवाबी कम नहीं हुई। उन्होंने अपनी चिर परिचित मुस्कान के साथ कहा था अजीब शहर है सीहोर, यहां के लोग कभी हाथी पर घुमाते हैं तो कभी ट्रक में पटक देते हैं।
गोदाम बना था सियासी ठिकाना
पैर में फ्रैक्चर के कारण अटल जी को ढाई महीने तक सीहोर में ही रुकना पड़ा। उन दिनों शहर में ठहरने के लिए बड़े होटल नहीं थे। ऐसे में सेठ नारायण दास कंपाउंड स्थित सेठ गोवर्धन दास अग्रवाल के एक गोदाम को साफ कर उनके रहने लायक बनाया गया। गजब का जज्बा देखिए कि बिस्तर पर लेटे-लेटे ही अटल जी ने पूरे चुनाव की कमान संभाल ली। वह गोदाम उस समय की सियासी चौपाल बन गया था, जहां से बनी रणनीति का ही नतीजा था कि जनसंघ के प्रत्याशी ने 10 हजार वोटों से बड़ी जीत दर्ज की।
बड़ा बाजार की वो ऐतिहासिक सभा
वर्ष 1980 में जब वे मुंबई अधिवेशन के लिए जा रहे थे, तब फिर सीहोर आए। बड़ा बाजार की वह ऐतिहासिक सभा आज भी लोगों के जेहन में ताजा है। वे निर्धारित समय से घंटों पहले आ गए और आम नागरिकों के बीच बैठकर पुरानी यादें ताजा कीं।


