सीहोर। जिले के विकास का रोडमैप तैयार करने के लिए मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में गठित जिला विकास समिति अपने वजूद में आते ही विवादों के घेरे में आ गई है। समिति में नामों के चयन को लेकर बुद्धिजीवी वर्ग और राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा जोरों पर है कि विकास की इस अति महत्वपूर्ण समिति में विशेषज्ञता से ज्यादा सियासी समीकरण और ‘अपनों’ को साधने का खेल खेला गया है।
समिति के गठन में सबसे ज्यादा चौंकाने वाला पहलू भोपाल संसदीय क्षेत्र का प्रतिनिधित्व है। नियमानुसार सांसद आलोक शर्मा इस समिति में सदस्य के रूप में शामिल हैं, लेकिन विवाद तब खड़ा हुआ जब उनके प्रतिनिधि मायाराम गौर को भी इसी समिति में ‘प्रगतिशील किसान’ के रूप में जगह दे दी गई। शहर के बुद्धिजीवियों का तर्क है कि जब सांसद की अनुपस्थिति में उनके प्रतिनिधि के तौर पर मायाराम गौर बैठकों में मशविरा देने के लिए वैसे ही मौजूद रहते हैं तो उन्हें अलग से सदस्य बनाने की क्या जरूरत थी। उनके स्थान पर जिले के किसी अन्य वास्तविक प्रगतिशील किसान को मौका मिल सकता था।
महत्वपूर्ण है समिति का उद्देश्य
बता दें कि इस समिति का ढांचा बहुत ऊंचा है। स्वयं मुख्यमंत्री इसके अध्यक्ष हैं और प्रभारी मंत्री कृष्णा गौर उपाध्यक्ष। इसका काम जिले के लिए रोजगार सृजन, बोकल फॉर लोकल को बढ़ावा देना और विकास का रोडमैप तैयार करना है, लेकिन जिस तरह से संगठन के पदाधिकारियों को उनके मूल पद से हटाकर अलग-अलग श्रेणियों में एडजस्ट किया गया है, उससे समिति की निष्पक्षता और उद्देश्यों पर सवालिया निशान लग रहे हैं।


