सीहोर। देश में बाल श्रम पर पूर्ण प्रतिबंध के बावजूद भैरुंदा क्षेत्र के ग्राम सीलकंठ में कानून की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। यहां चल रहे सडक़ और नाली निर्माण कार्यों में ठेकेदार द्वारा मासूम बच्चों से कड़ी मजदूरी कराई जा रही है। जिन हाथों में कलम और किताब होनी चाहिए, उन नन्हे हाथों से जोखिम भरे निर्माण कार्यों में पत्थर और मिट्टी ढुलवाई जा रही है।
सामाजिक कार्यकर्ता इंद्राज बरखने ने इस मामले की शिकायत भैरुंदा थाने में दर्ज कराई है। जानकारी के अनुसार ठेकेदार राजेश पंवार द्वारा करीब एक दर्जन नाबालिग बच्चों को बैतूल जिले से मजदूरी के लिए यहाँ लाया गया है। ये बच्चे सुबह से शाम तक कड़ी मेहनत करते हैं। सोशल मीडिया पर एक नाबालिग बालिका का काम करते हुए वीडियो भी वायरल हो रहा है, जो प्रशासन के दावों की पोल खोल रहा है।
शिकायत के बाद भी कार्रवाई में सुस्ती
शिकायतकर्ता का आरोप है कि उन्होंने पंचायत स्तर पर भी इसकी सूचना दी थी, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी मौन साधे हुए हैं। थाने में शिकायत के बाद भी अब तक ठेकेदार पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। ऐसा प्रतीत होता है कि श्रम विभाग और महिला बाल विकास जैसे विभाग केवल कागजों पर ही सक्रिय हैं, जबकि जमीनी हकीकत में बचपन दम तोड़ रहा है।
अधिकारियों का कहना
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस और श्रम विभाग ने अब जांच की बात कही है. भैरुंदा टीआई घनश्याम दांगी के अनुसार पुलिस मामले की जांच कर रही है और श्रमिकों के दस्तावेज मंगवाए गए हैं। वहीं श्रम पदाधिकारी एसएन संगोले ने बताया कि निरीक्षक को जांच के निर्देश दिए गए हैं और टीम गठित कर निर्माण स्थल का मुआयना किया जाएगा, जिसके बाद कार्रवाई होगी।


