सीहोर। शहर के मछलीपुल से लुनिया चौराहा तक बन रही ढाई करोड़ की सडक़ अब विवादों और लापरवाही के घेरे में है। जिस मार्ग को जनता की सुविधा के लिए बनाया जा रहा था, उसे नगर पालिका के इंजीनियरों और ठेकेदार की अनदेखी ने खतरे का मार्ग बना दिया। मामले की गंभीरता को देखते हुए नगर पालिका अध्यक्ष प्रिंस विकास राठौर ने कड़ा संज्ञान लिया है।
मछलीपुल से लुनिया चौराहा तक का यह मार्ग रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड और मंडी को जोडऩे वाला मुख्य रास्ता है। यहां लापरवाही का आलम यह था कि सडक़ के बीचों-बीच खड़े हाई वोल्टेज बिजली के खंभों को शिफ्ट किए बिना ही निर्माण कार्य शुरू कर दिया गया। ये खंभे न केवल तकनीकी रूप से गलत थे, बल्कि रात के अंधेरे में बड़े हादसों को न्योता दे रहे थे।
ग्राउंड जीरो पर पहुंचे नपाध्यक्ष
मीडिया में मामला उछलने के बाद सोमवार को नपाध्यक्ष प्रिंस विकास राठौर खुद निरीक्षण करने पहुंचे। उन्होंने मौके पर मौजूद ठेकेदार और इंजीनियरों की कार्यप्रणाली पर भारी नाराजगी जताई। उन्होंने दो टूक शब्दों में निर्देश दिए कि जनता की सुरक्षा से समझौता किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं होगा। जब तक बिजली के पोल शिफ्ट नहीं हो जाते, सडक़ का काम आगे नहीं बढ़ेगा। हम ऐसा विकास नहीं चाहते जो भविष्य में जानलेवा साबित हो।
‘पहाड़’ जैसी ऊंची सडक़
सडक़ की ऊंचाई को लेकर भी स्थानीय रहवासियों में भारी गुस्सा है। ठेकेदार ने पुरानी सडक़ की खुदाई करने के बजाय उसी पर मसाला डालकर उसे इतना ऊंचा कर दिया है कि आसपास के घर, दुकानें और मंदिर अब सडक़ से नीचे हो गए हैं। लोगों को डर है कि पहली बारिश में ही सारा पानी उनके घरों में घुस जाएगा और पूरा इलाका जलमग्न हो जाएगा।
करोड़ों का प्रोजेक्ट, फिर भी लापरवाही
करीब ढाई करोड़ की लागत से बनने वाली यह 11 मीटर चौड़ी डिवाइडर युक्त सडक़ वाल्मीकि मोहल्ले और शहरवासियों की पुरानी मांग थी। लेकिन ठेकेदार की मनमानी और जिम्मेदारों की चुप्पी ने इस प्रोजेक्ट की गुणवत्ता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब नपाध्यक्ष के कड़े तेवरों के बाद क्षेत्रवासियों को उम्मीद जगी है कि सडक़ का निर्माण सही मापदंडों और सुरक्षा मानकों के साथ पूरा होगा।


