न सुरक्षा, न शुद्ध पानी, हॉस्टल में सिस्टम की बदहाली के खिलाफ बेटियों का हल्लाबोल

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सीहोर। कहने को तो यह डॉ. भीमराव अम्बेडकर सरकारी महिला आईटीआई हॉस्टल है, लेकिन यहाँ रहने वाली बेटियों के लिए यह किसी नर्क से कम नहीं है। कड़ाके की ठंड में ठिठुरती रातें, पीने को गंदा पानी और सुरक्षा के नाम पर टूटे हुए दरवाजे, ये वो कड़वी सच्चाई है जिसे लेकर आज छात्राओं का सब्र टूट गया।
जब अफसरों ने जनसुनवाई में उनकी गुहार नहीं सुनी तो इन छात्राओं को मजबूरन एबीवीपी के साथ मिलकर भोपाल नाका की सडक़ पर उतरना पड़ा और चक्काजाम कर दिया।
डर के साये में रातें
छात्राओं की पीड़ा है कि हॉस्टल में न तो कोई चौकीदार है और न ही कमरों के दरवाजों में कुंडी। छात्राएं रात भर इस डर में जागती हैं कि अगर कोई अनहोनी हो गई या तबीयत बिगड़ गई तो उनकी मदद करने वाला कोई नहीं होगा।
ठंडे पानी से स्नान
छात्राओं की दूसरी पीड़ा है कि एक तरफ कड़ाके की ठंड पड़ रही है, वहीं दूसरी तरफ छात्राओं को गीजर न होने की वजह से बर्फीले पानी से नहाना पड़ रहा है। हद तो तब हो गई जब भंडार कक्ष में नए गद्दे और कंबल रखे होने के बावजूद छात्राओं को फटे पुराने गद्दे इस्तेमाल करने को दिए जा रहे हैं।
वॉटर कूलर खराब, गंदा पानी पीना मजबूरी
छात्राओं की तीसरी परेशानी है वाटर कूलर का खराब होना। गंदगी वाला पानी पीने से छात्राओं के बीमार होने का खतरा बढ़ गया है। खाने की क्वालिटी इतनी खराब है कि उसे निगलना मुश्किल है।
तहसीलदार ने संभाला मोर्चा
नाराज छात्राओं ने जब कॉलेज कैंपस में प्रिंसिपल के कमरे का घेराव किया तो वे वहां मौजूद नहीं थे। इसके बाद छात्राओं ने सडक़ पर मोर्चा संभाल लिया। स्थिति बिगड़ती देख तहसीलदार अमित सिंह मौके पर पहुंचे और भरोसा दिलाया कि हॉस्टल की सूरत जल्द बदली जाएगी।