मौनी अमावस्या पर आस्था का महासंगम, सलकनपुर सीढ़ी व सड़क मार्ग लगा घंटो जाम, दो लाख से अधिक श्रद्धालु दर्शनों के लिए पहुंचे

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सीहोर। माघ मास की पावन मौनी अमावस्या पर रविवार को नर्मदा अंचल श्रद्धा और भक्ति में सराबोर नजर आया। अलसुबह ब्रह्म मुहूर्त में करीब पांच बजे से ही श्रद्धालुओं ने मां नर्मदा में आस्था की डुबकी लगानी शुरू कर दी। कड़ाके की ठंड के बावजूद श्रद्धालुओं का उत्साह देखते ही बनता था। घाटों पर “हर-हर नर्मदे” और “नर्मदे हर” के जयकारों से वातावरण आध्यात्मिक ऊर्जा से भर गया। श्रद्धालु स्नान के साथ-साथ पूजन-पाठ, कथा और तर्पण करते नजर आए। यह पुण्य स्नान का सिलसिला दोपहर बाद तक लगातार जारी रहा।

नीलकंठ और आंवली घाट बने श्रद्धा के केंद्र

मौनी अमावस्या पर सीहोर जिले के नीलकंठ घाट, आंवलीघाट, सीलकंठ सहित अन्य नर्मदा घाटों पर भारी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। खासतौर पर नीलकंठ घाट और आंवलीघाट श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र बने रहे। भैरूंदा तहसील के समीप स्थित नीलकंठ घाट पर भगवान शिव के नीलकंठेश्वर स्वरूप का प्राचीन और सिद्ध मंदिर स्थापित है। मान्यता है कि यहां मां नर्मदा में स्नान और भगवान नीलकंठेश्वर के दर्शन से जन्म-जन्मांतर के कष्ट दूर हो जाते हैं। श्रद्धालुओं का विश्वास है कि यहां मिलने वाला पुण्य काशी जैसे तीर्थों के समान फलदायी होता है।

सलकनपुर धाम में उमड़ा भक्तों का जनसैलाब

नर्मदा स्नान के बाद बड़ी संख्या में श्रद्धालु देवीधाम सलकनपुर में मां बीजासन के दर्शन के लिए पहुंचे। मौनी अमावस्या के पावन अवसर पर सलकनपुर धाम में आस्था का अभूतपूर्व दृश्य देखने को मिला। रविवार को करीब दो लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने मातारानी के दर्शन किए। मंदिर परिसर से लेकर आसपास के क्षेत्र तक भक्तों की भीड़ लगी रही और “जय माता दी” के जयघोष लगातार गूंजते रहे। श्रद्धालु मातारानी से सुख-समृद्धि और परिवार की खुशहाली की कामना करते नजर आए।

रोपवे बंद, सीढ़ी व सड़क मार्ग पर घंटों जाम

इस दौरान सलकनपुर में मां बीजासन रोपवे सेवा अस्थायी रूप से बंद रहने से श्रद्धालुओं को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। कन्वेयर रोपवे सर्विस, कोलकाता द्वारा संचालित रोपवे 16 जनवरी से 20 जनवरी तक तकनीकी रखरखाव और सुरक्षा जांच के चलते बंद है। रोपवे बंद होने से श्रद्धालुओं को सीढ़ी मार्ग और सड़क मार्ग से ही दर्शन करने पड़े, जिससे दोनों मार्गों पर घंटों जाम की स्थिति बनी रही। भारी भीड़ के बावजूद श्रद्धालुओं की आस्था और धैर्य देखते ही बनता था। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मौनी अमावस्या पर मौन रहकर स्नान, दान-पुण्य और भगवान विष्णु की पूजा से अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है। इसी विश्वास के साथ श्रद्धालुओं ने कठिनाइयों के बावजूद दर्शन कर पुण्य लाभ अर्जित किया।