ले-आउट तय नहीं, कभी यहां खुदाई तो कभी वहां, हाउसिंग बोर्ड में 8 दिन से पानी सप्लाई ठप, सीवेज का गंदा पानी घरों में लौटा
सीहोर। इंदौर में दूषित पानी से हुई 15 मौतों के बाद पूरे प्रदेश में हडक़ंप मचा है, लेकिन सीहोर में जिम्मेदार अधिकारी शायद किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहे हैं। शहर के हाउसिंग बोर्ड क्षेत्र में बन रहे रेलवे ओवरब्रिज के काम ने जनता का जीना मुहाल कर दिया है। ब्रिज कॉर्पोरेशन की मनमानी और बिना किसी ले-आउट के की जा रही खुदाई के कारण शहर की पेयजल और सीवेज लाइनें क्षतिग्रस्त हो रही है। हालात इतने बिगड़ गए हैं कि शनिवार को नगर पालिका अमले ने मौके पर पहुंचकर निर्माण एजेंसी का जनरेटर जब्त कर काम रुकवा दिया।
ब्रिज कॉर्पोरेशन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए नगर पालिका के अधिकारियों का कहना है कि निर्माण एजेंसी का ले-आउट ही फिक्स नहीं है। वे कभी एक जगह खुदाई शुरू कर देते हैं तो कभी दूसरी जगह। इस कारण पिछले दो महीनों में एक दर्जन से अधिक बार क्षेत्र की पेयजल पाइप लाइन क्षतिग्रस्त हो चुकी है। इसका सबसे बुरा असर वार्ड नंबर 9 और 21 में पड़ा है। हाउसिंग बोर्ड क्षेत्र में पिछले 8 दिनों से नल नहीं खुले हैं। लोग पानी के लिए तरस रहे हैं। फिलहाल नगर पालिका तीन टैंकरों के माध्यम से पानी की टंकी भरकर काम चला रही है।
घरों में लौटा सीवेज का गंदा पानी
ब्रिज कॉर्पोरेशन की लापरवाही सिर्फ पानी रोकने तक सीमित नहीं है। खुदाई के दौरान सीवेज लाइनें भी फोड़ दी गई हैं। इसके चलते अवधपुरी, चाणक्यपुरी और ड्रीम सिटी जैसे इलाकों में सीवेज का गंदा पानी बैक मारकर लोगों के घरों के बाथरूम और टॉयलेट में लौटने लगा है। इतना ही नहीं यह गंदा पानी जमीन के जलस्त्रोत (बोरिंग) में भी रिसने लगा है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि लोग बीमार पडऩे लगे हैं। पार्षद प्रतिनिधि कमलेश कुशवाह ने बताया कि पिछले दो महीने से लोग परेशान हैं, बार-बार पाइप लाइन टूटने से गंदा पानी पेयजल लाइन में मिलने का खतरा बढ़ गया है, जो इंदौर जैसी त्रासदी को न्योता दे सकता है।
अब तक जमा नहीं कराए 85 लाख रुपए
नगर पालिका उपयंत्री विजय कोली ने बताया कि ब्रिज कॉर्पोरेशन ने एक साल पहले पाइप लाइन और सीवेज लाइन को शिफ्ट करने के लिए डिमांड मांगी थी। नगर पालिका ने करीब 85 लाख रुपये का एस्टीमेट बनाकर भेजा था, लेकिन एक साल बीत जाने के बाद भी कॉर्पोरेशन ने राशि जमा नहीं की। बिना राशि जमा किए और बिना अनुमति के खुदाई जारी रखी गई। बार-बार चेतावनी देने के बाद भी जब काम करने का तरीका नहीं बदला तो शनिवार को नगर पालिका की जल शाखा और अतिक्रमण शाखा की टीम मौके पर पहुंची। नपा अमले ने निर्माण एजेंसी का जनरेटर जब्त कर लिया है।
अधिकारियों को एक्शन लेने की जरुरत
ब्रिज कॉर्पोरेशन की इस लापरवाही ने जिला प्रशासन की कार्यशैली पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। हाउसिंग बोर्ड में चल रहे इतने बड़े निर्माण कार्य में समन्वय की कमी दिख रही है। अगर समय रहते पाइप लाइनों को सही तरीके से शिफ्ट नहीं किया गया और लीकेज बंद नहीं हुए तो पाइपों में जमा होने वाला कीचड़ और सीवेज का पानी किसी भी दिन महामारी का रूप ले सकता है।
ले-आउट फिक्स नहीं
ब्रिज कॉर्पोरेशन का ले-आउट फिक्स नहीं है, जिसके कारण हमारी पाइप लाइन बार-बार डैमेज हो रही है। उन्होंने 85 लाख रुपये की राशि भी जमा नहीं की है। चेतावनी के बाद भी सुधार न होने पर हमने जनरेटर जब्त कर काम रुकवा दिया है।
विजय कोली, उपयंत्री नगर पालिका सीहोर


