सीहोर। देश में सरकारी योजनाओं के नाम बदलने की राजनीति अब सडक़ों पर उतरने के लिए तैयार है। केंद्र सरकार द्वारा ‘मनरेगा’ महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम का नाम बदलकर विकसित भारत गारंटी रोजगार आजीविका मिशन ग्रामीण किए जाने के फैसले ने प्रदेश की सियासत में उबाल ला दिया है। प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और राज्यसभा सांसद दिग्विजय सिंह ने इस बदलाव को सीधे तौर पर राष्ट्रपिता महात्मा गांधी का अपमान करार देते हुए मोर्चा खोल दिया है।
पूर्व सीएम दिग्विजय सिंह ने ऐलान किया है कि वे इस फैसले के विरोध में आगामी 5 जनवरी से केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान के गृह जिले सीहोर से एक बड़ी पदयात्रा की शुरुआत करेंगे। पूर्व सीएम दिग्विजय सिंह का आरोप है कि केंद्र सरकार सोची-समझी साजिश के तहत महापुरुषों और विशेषकर महात्मा गांधी की विरासत को मिटाना चाहती है। लोकसभा में इस बदलाव से जुड़ा बिल पास होने के बाद अब कांग्रेस इसे जनता के बीच ले जाने की तैयारी में है।
मजदूरों को करेंगे लामबंद
पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह की यह पदयात्रा सीहोर जिले की किसी ग्राम पंचायत से शुरू होगी। बता दें राजनीतिक गलियारों में पूर्व सीएम शिवराज सिंह चौहान और केंद्र सरकार को उनके ही गढ़ में घेरने की एक बड़ी रणनीति के रूप में देख रहे हैं। इस यात्रा के जरिए दिग्विजय सिंह न केवल ग्रामीण मजदूरों को लामबंद करेंगे, बल्कि गांधी कार्ड खेलकर भावनात्मक रूप से भी जनता को जोडऩे का प्रयास करेंगे।
2006 से शुरू हुई थी योजना
गौरतलब है कि मनरेगा महत्वपूर्ण और बुनियादी योजना रही है, जो ग्रामीण परिवारों के वयस्क सदस्यों को एक वित्तीय वर्ष में कम से कम 100 दिनों के अकुशल शारीरिक श्रम की कानूनी गारंटी देती है। इस अधिनियम को सितंबर 2005 में पारित किया गया था और 2 फरवरी 2006 को आंध्र प्रदेश के अनंतपुर से इसकी शुरुआत हुई थी। प्रारंभ में इसे नरेगा के नाम से जाना जाता था, लेकिन 2 अक्टूबर 2009 को इसमें महात्मा गांधी का नाम जोड़ा गया था। अब दिसंबर 2025 में केंद्र सरकार ने इसके ढांचे में आमूलचूल परिवर्तन करते हुए इसे विकसित भारत गारंटी रोजगार आजीविका मिशन ग्रामीण का नया नाम दिया है।


