सीहोर/छतरपुर। इस साल भी महाशिवरात्रि पर मध्य प्रदेश के दो सबसे बड़े आध्यात्मिक केंद्र बागेश्वर धाम और कुबेरेश्वर धाम एक बार फिर सुर्खियों में हैं, लेकिन इस बार चर्चा केवल प्रवचनों की नहीं, बल्कि ‘नियत और नीति’ की भी हो रही है। जहां एक ओर छतरपुर में बागेश्वर धाम सरकार पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री 600 परिवारों ‘300 कन्याओं’ के जीवन में खुशियों का उजाला लाने की तैयारी कर चुके हैं, वहीं दूसरी ओर सीहोर के कुबेरेश्वर धाम में पंडित प्रदीप मिश्रा की सात दिवसीय कथा के बीच उनके पुराने वादों की कसक भक्तों को परेशान कर रही है।
बता दें छतरपुर के बागेश्वर धाम में महाशिवरात्रि केवल एक पर्व नहीं, बल्कि सेवा का महाकुंभ बनने जा रहा है। पंडित धीरेंद्र शास्त्री 300 निर्धन कन्याओं का भव्य विवाह संपन्न कराकर एक बार फिर लाखों भक्तों का दिल जीतने के लिए तैयार हैं।
13-15 फरवरी का शेड्यूल
बागेश्वर धाम पर उत्सव की शुरुआत कल 13 फरवरी से मंडप और हल्दी की रस्मों के साथ होगी। 14 को संगीत और 15 फरवरी को मुख्य विवाह संस्कार होगा। देश-विदेश से मेहमान इस सेवा यज्ञ के साक्षी बनने पहुंच रहे हैं। यहां संदेश साफ है महाराज जी केवल मंच से उपदेश नहीं दे रहे, बल्कि जमीन पर बेटियों की डोली उठा रहे हैं।
कुबेरेश्वर धाम: शिवपुराण तो होगी, पर बेटियों का क्या?
दूसरी तरफ सीहोर के कुबेरेश्वर धाम में 14 से 20 फरवरी तक शिव महापुराण कथा की गूंज तो होगी, लेकिन पंडित प्रदीप मिश्रा के एक पुराने वादे पर अब सवाल उठने लगे हैं। साल 2024 में पंडित मिश्रा ने बड़े ताम-झाम के साथ घोषणा की थी कि वे साल के 365 दिन 365 निर्धन कन्याओं का नि:शुल्क विवाह कराएंगे। संकल्प था कि हर दिन एक बेटी की डोली उठेगी, लेकिन साल बीत गया और अब तक इस दिशा में एक ‘ईंट’ भी नहीं रखी जा सकी। श्रद्धालु पूछ रहे हैं कि क्या इस बार भी केवल कथा की मिठास ही मिलेगी या पिछले वादे को निभाने की कोई ठोस शुरुआत होगी।
‘भक्ति और प्रतिस्पर्धा’ के बीच प्रशासन अलर्ट
प्रदेश के इन दो बड़े आयोजनों को लेकर प्रशासन अलर्ट मोड पर है। एक ओर जहां बागेश्वर धाम में बेटियों की विदाई भावुक करेगी, वहीं कुबेरेश्वर धाम में शिव चर्चा श्रद्धालुओं को सराबोर करेगी। देखना दिलचस्प होगा कि शिवरात्रि के इस पावन पर्व पर सेवा का यह प्रतिस्पर्धी माहौल समाज को क्या नया संदेश देता है और कौन वास्तव में जनता की उम्मीदों पर खरा उतरता है।


